पीठ न कहा है कि अत्यंत आवश्यक होने पर ही पीठों का गठन किया जाता है। याचिका में एनजीटी अधिनियम की धारा-3 को चुनौती दी गई थी। अधिनियम की धारा-3 ऐसे न्यायाधिकरण की स्थापना के लिए केंद्र सरकार की शक्तियों से संबंधित है।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि हर राज्य में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल(एनजीटी) की पीठ स्थापित नहीं की जा सकती हैं। साथ ही शीर्ष अदालत ने एनजीटी के आदेशों के खिलाफ शीर्ष अदालत में सीधे अपील की अनुमति देने वाले प्रावधान की वैधता को भी बरकरार रखा है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) अधिनियम की धारा-3 की संवैधानिकता को बरकरार रखा जो केंद्र सरकार को ट्रिब्यूनल स्थापित करने की शक्ति देता है।
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जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस हृषिकेश रॉय की पीठ ने कहा कि एनजीटी पीठों की सीट जरूरत के अनुसार स्थित हो सकती है और हर राज्य में उनका होना जरूरी नहीं है। शीर्ष अदालत ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय अधिवक्ता बार एसोसिएशन और अन्य द्वारा भोपाल एनजीटी को जबलपुर में स्थानांतरित करने के लिए दायर याचिका को खारिज कर दिया।
पीठ ने कहा कि इस तरह की प्रार्थना अनुचित है। पीठ न कहा है कि अत्यंत आवश्यक होने पर ही पीठों का गठन किया जाता है। याचिका में एनजीटी अधिनियम की धारा-3 को चुनौती दी गई थी। अधिनियम की धारा-3 ऐसे न्यायाधिकरण की स्थापना के लिए केंद्र सरकार की शक्तियों से संबंधित है।
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शीर्ष अदालत ने यह भी कहा है कि एनजीटी के आदेशों के खिलाफ सीधे सर्वोच्च न्यायालय में अपील करना हाईकोर्ट के अधिकार को कमजोर नहीं करती है। इस प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिका में तर्क दिया गया था कि यह केंद्र सरकार को हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों, केंद्रीय मंत्रिमंडल या राष्ट्रपति के साथ पर्याप्त परामर्श के बिना एनजीटी पीठों को अधिसूचित करने के लिए अत्यधिक व अनियंत्रित शक्तियां देता है।