सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) की ओर से दिल्ली सरकार की कैबिनेट की सहायता और सलाह के बिना दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) में 10 'एल्डरमैन' की नियुक्ति के मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। मामले में एलजी के फैसले के खिलाफ आम आदमी पार्टी की अगुवाई वाली दिल्ली सरकार ने याचिका लगाई थी।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जेबी पारदीवाला की पीठ ने कहा कि इस तरह के नामांकन एमसीडी को प्रभावी रूप से अस्थिर कर सकते हैं क्योंकि ऐसे एल्डरमैन के पास मतदान शक्ति होती है।
सीजेआई ने कही यही बात
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उपराज्यपाल को एमसीडी में ‘एल्डरमैन’ नामित करने का अधिकार देने का मतलब है कि वह निर्वाचित नगर निकाय को अस्थिर कर सकते हैं। सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ ने एमसीडी में ‘एल्डरमैन’ को नामित करने के उपराज्यपाल के अधिकार को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित रखते हुए यह बात कही।
बीते दिन भी कोर्ट ने किया था सवाल
पीठ ने कहा कि क्या एमसीडी में 12 विशिष्ट लोगों का नामांकन केंद्र के लिए इतना चिंता का विषय है? दरअसल, उपराज्यपाल को यह अधिकार देने का मतलब होगा कि वह लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई नगर समितियों को अस्थिर कर सकते हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि एल्डरमैन के पास मतदान के अधिकार भी होंगे। दरअसल, कोर्ट ने निर्वाचित सरकार की सहायता और परामर्श के बिना दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) में 10 ‘एल्डरमैन’ को नामित करने के लिए उपराज्यपाल के संविधान तथा कानून के तहत अधिकार के स्रोत के बारे में मंगलवार को सवाल किया था।
याचिका में किया गया यह दावा
- दिल्ली सरकार की ओर से दायर याचिका में दावा किया गया है कि 1991 में संविधान के अनुच्छेद 239AA के लागू होने के बाद से यह पहली बार है कि उपराज्यपाल ने चुनी हुई सरकार को पूरी तरह दरकिनार करते हुए इस तरह से 'एल्डरमैन' को नामित किया है।
- इसमें यह भी कहा गया कि एलजी मंत्रिपरिषद की मदद और सलाह पर कार्य करने के लिए बाध्य हैं। यदि कोई मतभेद होता है, तो वह इस मुद्दे को राष्ट्रपति के पास भेज सकते हैं।
- याचिका में कहा गया कि उपराज्यपाल के पास सिर्फ दो ही विकल्प हैं, पहला- चुनी हुई सरकार की ओर से सुझाए गए गए नामों को मंजूर किया जाए और दूसरा- अगर प्रस्ताव पर सहमति न बने तो इसे राष्ट्रपति के पास भेज दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने मार्च में इस मामले में दिल्ली एलजी से जवाब मांगा था।
सुनवाई के दौरान आज क्या हुआ?
- मामले में आज सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था कि एलजी केवल अपने मुताबिक सदस्यों को नामांकित कर रहे थे। सिंघवी ने दलील दी कि जहां एलजी का जिक्र है, उसका मतलब है 'मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह पर'। 30 साल से इसका पालन किया जा रहा था। 'सहायता और सलाह' के अर्थ को इस तरह बदलने की कोशिश की जा रही है।
- इस पर अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल संजय जैन ने कहा कि अगर एक प्रथा कानून के खिलाफ है तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि यह 30 साल से चली आ रही है।
- इसके बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया। सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में ही साफ कर दिया था कि 'एल्डरमैन' मेयर के चुनाव में मतदान नहीं कर सकते हैं।