सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को खोरी गांव मामले पर निवासियों को बड़ी राहत दी है। शीर्ष अदालत ने कहा कि फरीदाबाद नगर निगम अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए खोरी गांव निवासियों की पुनर्वास योजना के तहत ईडब्ल्यूएस फ्लैट पाने के पात्र लोगों को कब्जा पत्र जारी होने तक उन्हें 2,000 रुपये प्रतिमाह हर्जाना दे।
जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस एएस ओक और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील वरिष्ठ अधिवक्ता संजय पारिख ने पीठ को बताया कि प्रोविजनल आवंटन के तहत कुछ आवेदकों को फ्लैट तो दिए गए लेकिन वे रहने लायक नहीं है। उन्होंने कहा कि हर्जाने का भुगतान जोकि पहले छह महीने के लिए किया जाना था, उस वक्त तक जारी रहना चाहिए जब तक कि लोगों को रहने योग्य फ्लैट नहीं मिल जाते।
निगम देता रहेगा 2,000 रुपये प्रतिमाह का हर्जाना
फरीदबाद नगर निगम की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि 1,027 आवेदक पात्र पाए गए हैं। उन्हें अप्रैल के अंत तक स्थायी फ्लैट आवंटित कर दिए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पात्र लोगों को स्थायी आवास दिए जाने तक निगम उन्हें 2,000 रुपये प्रतिमाह का हर्जाना देता रहेगा और यह कब्जा पत्र जारी होने तक चलेगा। पीठ ने कहा कि यह तथ्य कि परिसर रहने योग्य नहीं है, इसका नगर निगम के आयुक्त द्वारा सत्यापन कराया जाए और उसके बाद ही कब्जा पत्र जारी किया जाए।