महात्मा गांधी की हत्या की नए सिरे से जांच की मांग वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित रखते हुए साफ किया कानूनी दलीलों के आधार पर इसका निर्णय किया जाएगा न कि भावनाओं के आधार पर। मालूम हो कि डॉ. पंकज फडणीस ने गांधी की हत्या की पुन:जांच कराने की मांग की है।
न्यायमूर्ति एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि याचिका में अकादमी शोध के आधार पर मामले की नए सिरे से जांच की गुहार की गई है लेकिन वर्षों पहले हुई घटना को दोबारा खोलने का यह आधार नहीं हो सकता।
याचिकाकर्ता ने गांधी की हत्या में तीन गोलियां चलने की थ्योरी पर भी सवाल उठाया। याचिकाकर्ता ने आशंका जताई है कि चौथी गोली भी चली थी और उसे गोडसे के अलावा किसी और ने चलाई थी। इसकी जांच होनी चाहिए। याचिकाकर्ता ने इस मामले में लीपापोती करने का आरोप लगाया।
पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा, ‘आप कह रहे हैं कि लोगों को यह जानने का अधिकार है कि आखिर क्या हुआ था। लेकिन ऐसा लगता है कि लोगों को यह पहले से ही पता है। आप लोगों के दिमाग में संदेह पैदा कर रहे हैं। वास्तव में जिन्होंने गांधी की हत्या की थी, उनकी पहचान हो गई थी और उन्हें फांसी दे दी गई।’
याचिकाकर्ता ने कपूर कमीशन की रिपोर्ट में विनायक दामोदर सावरकर के खिलाफ की गई टिप्पणी को हटाने की गुहार की और उस घटना के पीछे के षड्यंत्र का पता लगाने के लिए कमीशन के गठन की मांग की।
याचिकाकर्ता ने कहा कि रिपोर्ट में की गई टिप्पणी मराठा समुदाय को बदनाम करने वाली है। इस पर पीठ ने कहा कि दो लोग किसी समुदाय या राज्य का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। मराठा समुदाय आज भी वजूद में है। दो लोगों के खिलाफ की गई टिप्पणी से मराठा समुदाय बदनाम नहीं हो सकता।