सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को यह दावा करने पर फटकार लगाई कि लॉकडाउन के बाद प्रवासी श्रमिकों की मदद में कोई कमी नहीं रखी। साथ ही अब कोई भी श्रमिक मूल राज्य वापस जाने के लिए नहीं बचा है।
अदालत ने राज्य सरकार की ओर से दायर उस हलफनामे पर एतराज जताया, जिसमें दावा किया गया था कि महाराष्ट्र में सब ठीक है। कोर्ट ने कहा, यह जानकारी मिली है कि महाराष्ट्र में अब भी प्रवासी श्रमिक फंसे हैं और वे घर जाने के लिए तैयार हैं।
अब इस मामले पर 17 जुलाई को सुनवाई होगी
जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने महाराष्ट्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा, राज्य सरकार का कर्तव्य है कि वह समस्याओं का पता लगाए और सुधारात्मक कार्रवाई करे।
राज्य सरकार प्रवासियों की समस्याओं और उनके दर्द को लेकर शुरू की गई स्वत: संज्ञान की कार्यवाही को प्रतिकूल मुकदमेबाजी मान रही है। मेहता ने अदालत को बताया कि इस संबंध में अतिरिक्त हलफनामा दायर किया जाएगा। जो लोग वापस लौटना चाहते थे, उन्हें सुविधा प्रदान की गई थी। लॉकडाउन में ढील के बाद 3.5 लाख श्रमिक काम पर लौट आए हैं।
बिहार सरकार कर रही कोशिश
बिहार सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार ने कहा, राज्य सरकार श्रमिकों के कौशल के अनुसार रोजगार प्रदान करने के लिए प्रयास कर रही है। श्रमिक शहरों की ओर लौटने लगे हैं और बिहार से ट्रेनें पूरी क्षमता से चल रही हैं।
प्रवासियों के लिए बने राष्ट्रीय योजना
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कोरोना से उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए एक राष्ट्रीय योजना बनाने पर जोर दिया। जबकि वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने प्रवासी श्रमिकों को बीमा कवर प्रदान करने की योजना और उनके पुनर्वास के लिए एक केंद्रीकृत योजना बनाने की बात कही।