आईपीसी की धारा 377 को रद्द करने के लिए दाखिल की गई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को एक हफ्ते के भीतर जवाब देने को कहा है। यह याचिका होटेलियर केशव सूरी द्वारा दाखिल की गई है। केशव ने याचिका में मांग की है कि धारा 377 को रद्द किया जाए।
बता दें यह धारा होमोसेक्सुअल बिहेवियर को क्रिमिनल एक्टिविटी की कैटिगरी में रखती है। इसके लिए कोर्ट ने केंद्र को एक नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। केशव ने अपनी याचिका में कहा है कि दो वयस्कों के बीच सहमति से बने समलैंगिक संबंधों को अपराधमुक्त किया जाना चाहिए। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट समलैंगिक यौन संबंधों को अपराध मानने वाली धारा पर विचार करने के लिए तैयार हो गया है। इस पर सीजेआई दीपक मिश्रा ने कहा कि कोर्ट के पहले के आदेश पर पुनर्विचार किए जाने की जरूरत है।
बता दें आईपीसी की धारा 377 के तहत यदि 2 लोग आपसी सहमति या असहमति से अप्राकृतिक संबंध बनाते हैं तो उसे अपराध माना जाएगा। जिसके लिए 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा रका प्रावधान रखा गया है। यह अपराध गैरजमानती श्रेणी में आता है। वहीं इस धारा के खिलाफ कई अन्य याचिकाएं भी दाखिल की गई थीं। जिनमें कहा गया था कि आईपीसी की धारा 377 (अनुच्छेद 21) जीने का अधिकार, (अनुच्छेद 14) समानता के अधिकार का उल्लंघन करती है।
गौरतलब है कि दिल्ली हाई कोर्ट ने 2009 में समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से हटाने का फैसला लिया था लेकिन 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले के विरोध में फैसला सुनाया और इसे अपराध की श्रेणी में बरकरार रखा।