जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने कहा कि उसने निर्णय का अध्ययन किया है और उसका विचार है कि इस मुद्दे पर एक बड़ी पीठ द्वारा विचार करने की आवश्यकता नहीं है।
तमिलनाडु में सरकारी नौकरियों औरशिक्षण संस्थानों में प्रवेश में वंनियार को 10.5 प्रतिशत आरक्षण को रद्द करने के मद्रास हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों को बड़ी पीठ के पास भेजने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है। वंनियार, सबसे पिछड़े समुदाय (एमबीसी) की श्रेणी में आता है।
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जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने कहा कि उसने निर्णय का अध्ययन किया है और उसका विचार है कि इस मुद्दे पर एक बड़ी पीठ द्वारा विचार करने की आवश्यकता नहीं है। पीठ ने कहा कि हम मामले को बड़ी पीठ के पास भेजने के तर्क के पक्ष में नहीं हैं, आप अपनी दलीलें शुरू कर सकते हैं।
शीर्ष कोर्ट ने मंगलवार को कहा था कि वह मामले के गुण-दोष में जाए बिना मामले को बड़ी पीठ के पास भेजने के मुद्दे पर फैसला करेगी। तमिलनाडु की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने मंगलवार को कहा था कि मामले में संवैधानिक मुद्दे शामिल हैं और इस पर एक बड़ी पीठ द्वारा विचार किए जाने की आवश्यकता है।