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Dress Code: शिक्षण संस्थानों में ड्रेस कोड की मांग पर तुरंत सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

Fri, 15 Jul 2022 03:35 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, नई दिल्ली।

सार

सुप्रीम कोर्ट की पीठ से वकील अश्विनी उपाध्याय ने आग्रह किया कि उनकी पीआईएल को भी हिजाब विवाद पर कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों के साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।
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सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : PTI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को उस जनहित याचिका (पीआईएल) पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया जिसमें राष्ट्रीय एकता और सद्भाव को बढ़ावा देने तथा समानता सुनिश्चित करने के लिए पंजीकृत शिक्षण संस्थानों में छात्रों और कर्मचारियों के लिए समान ड्रेस कोड लागू करने का केंद्र व राज्यों को निर्देश देने की मांग की गई थी।

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चीफ जस्टिस एनवी रमण की अध्यक्षता वाली पीठ से वकील अश्विनी उपाध्याय ने आग्रह किया कि उनकी पीआईएल को भी हिजाब विवाद पर कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों के साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। इससे पहले बुधवार को जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने वकील प्रशांत भूषण की याचिका का संज्ञान लिया था और कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं को सुनवाई के लिए अगले हफ्ते सूचीबद्ध किया था।

शुरुआत में उपाध्याय ने कहा कि यह मामला एक समान ड्रेस कोड का है। इस पर पीठ ने कहा कि हमने आपको कई बार कहा है। हमें इसे दोहराने के लिए मजबूर न करें। आप हर दिन एक पीआईएल दाखिल करते हैं। आपने कितने मामले दायर किए हैं? ऐसा लगता है जैसे कोई नियमित मामला ही नहीं चल रहा है। हमें नहीं पता, आप हर मामले में आ जाते हैं। यह अपने नियत समय पर आएगा। इंतजार करिए...।
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उपाध्याय ने कहा कि कोर्ट बुधवार को हिजाब मामले की सुनवाई के लिए सहमत हुआ था। मैंने यह पीआईएल फरवरी में दाखिल की थी। इससे पहले फरवरी में निखिल उपाध्याय ने वकीलों अश्विनी उपाध्याय और अश्विनी दुबे के जरिये पीआईएल सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की थी। इसमें हिजाब विवाद को देखते हुए शिक्षण संस्थानों में समान ड्रेस कोड को लागू करने की मांग की गई थी।

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मौलिक कर्तव्यों के पालन के लिए कानून लाने की मांग पर दो महीने में जवाब दे केंद्र : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकों के लिए संविधान में निहित मौलिक कर्तव्यों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कानून या नियम लागू करने की मांग वाली याचिका पर जवाब देने के लिए केंद्र सरकार को दो महीने का और वक्त दे दिया है।

जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एमएम सुंदरेश की पीठ ने सरकार को दो महीने के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने पीठ को बताया कि विभिन्न विभागों और मंत्रालयों से इनपुट मांगे गए हैं और उनके जवाब का इंतजार है।

ठ ने मामले में आगे की सुनवाई 26 सितंबर के लिए तय की है। 21 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने वकील दुर्गा दत्त द्वारा दायर जनहित याचिका पर केंद्र और राज्यों को नोटिस जारी किया गया था। इसमें संविधान में निहित नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों के पालन को कानून लाने की मांग की गई है।

अदालत ने लोगों को संवेदनशील बनाने और मौलिक कर्तव्यों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए तब तक उठाए गए कदमों पर सरकार से जवाब मांगा था। याचिका में कहा गया है कि संविधान ने नागरिकों को कुछ मौलिक अधिकार प्रदान किए हैं, लेकिन नागरिकों को लोकतांत्रिक आचरण और लोकतांत्रिक व्यवहार के कुछ बुनियादी मानदंडों का पालन करने की भी आवश्यकता है क्योंकि अधिकार और कर्तव्य एक साथ होते हैं।
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