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Supreme Court: 'क्या आप राज्य सरकार के अधिकार छीन रहे हैं?' तमिलनाडु शराब घोटाले में ईडी को 'सुप्रीम' फटकार

Tue, 14 Oct 2025 05:54 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

तमिलनाडु शराब घोटाले की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने पूछा कि क्या केंद्र की एजेंसी राज्य सरकार के अधिकारों में दखल दे रही है। यह मामला राज्य की शराब बिक्री कंपनी TASMAC से जुड़ा है, जहां ईडी ने छापेमारी कर मोबाइल और कंप्यूटर जब्त किए थे।

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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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तमिलनाडु में शराब घोटाले को लेकर चर्चा तेज है। ऐसे में मामले की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने पूछा कि क्या केंद्र की एजेंसी राज्य सरकार के अधिकार छीन रही है? क्या ऐसा करना संघीय ढांचे के खिलाफ नहीं है? बता दें कि यह मामला तमिलनाडु राज्य विपणन निगम लिमिटेड (TASMAC) से जुड़ा है, जो राज्य में शराब की थोक और खुदरा बिक्री पर एकाधिकार रखती है। ईडी ने मार्च में दो बार छापेमारी की थी और अपराध से जुड़े सबूत मिलने का दावा किया था।

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मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने ईडी से पूछा कि राज्य सरकार ने खुद एफआईआर दर्ज की हैं और जांच कर रही है, तो आप बीच में क्यों आ रहे हैं? क्या आप खुद ही जाकर जांच कर सकते हैं? क्या इससे राज्य के अधिकारों का हनन नहीं होता? मुख्य न्यायाधीश ने आगे कहा कि पिछले छह साल में मैंने कई ईडी की जांचें देखी हैं, लेकिन अब मैं ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा, नहीं तो मीडिया में छप जाएगा।

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सुप्रीम कोर्ट में तमिलनाडु सरकार की दलील
 
मामले में राज्य सरकार की ओर वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और मुकुल रोहतगी ने दलील दी। उन्होंने कहा कि हमने पहले ही एफआईआर दर्ज की हैं। ईडी ने TASMAC ऑफिस में छापा मारकर कर्मचारियों के मोबाइल जब्त कर लिए, कंप्यूटर उठा लिए। महिला कर्मचारियों को भी घंटों तक रोका गया, जो निजता का उल्लंघन है।

कपिल सिब्बल ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 66(2) का हवाला दिया और कहा कि अगर ईडी को किसी और अपराध के सबूत मिलते हैं, तो उसे उस जानकारी को संबंधित एजेंसी के साथ साझा करना होता है।

ईडी ने क्या दिया जवाब
वहीं कोर्ट की फटकार के बाद ईडी की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि राज्य पुलिस ने 47 केस दर्ज किए हैं, लेकिन फिर भी भ्रष्टाचार जारी है। हम केवल मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) की जांच कर रहे हैं। हमें भारी मात्रा में अवैध कैश, फर्जी दस्तावेज और ठेके में गड़बड़ी के सबूत मिले हैं।

ईडी की दलील सुनने के बाद मुख्य न्यायाधीश ने फिर से सवाल किया कि अगर आपने सबूत पाए हैं तो उसे राज्य को क्यों नहीं सौंपा? जिस पर सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट का समर्थन करते हुए कहा फोन ले गए, चैट्स ले गए... फिर हमें ही वापस क्यों नहीं देते? ध्यान रहे यह मामला सुप्रीम कोर्ट तब पहुंचा जब डीएमके सरकार और TASMAC ने मद्रास हाईकोर्ट के 23 अप्रैल के फैसले को चुनौती दी, जिसमें ईडी को जांच जारी रखने की अनुमति दी गई थी। राज्य सरकार ने कहा कि TASMAC खुद कई मामलों में शिकायतकर्ता है, आरोपी नहीं। इसलिए ईडी के पास पीएमएलए के तहत जांच का कोई अधिकार नहीं बनता।

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क्या है ईडी का आरोप, समझिए
गौरतलब है कि मामले में  ईडी का आरोप है कि TASMAC में 1,000 करोड़ रुपये की बेहिसाब नकदी पाई गई। कुछ डिस्टिलरी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए ठेकों में हेराफेरी की गई। हर शराब की बोतल पर 10 से 30 रुपये का अवैध शुल्क वसूला गया। ईडी का कहना है कि यह सब TASMAC अधिकारियों की मिलीभगत से हुआ।

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