सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाईकोर्ट का आदेश रद्द करते हुए एक आरोपी को इलाज के लिए अमेरिका जाने की अनुमति देने से मना कर दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि भारत की चिकित्सा सुविधाएं दुनिया के किसी भी देश से कम नहीं हैं और न्याय प्रणाली में आरोपी की स्वतंत्रता व पीड़ित के अधिकारों के बीच संतुलन जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि भारत में मिलने वाली चिकित्सा सुविधाएं दुनिया के किसी भी देश के बराबर हैं। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने एक आरोपी को इलाज के लिए अमेरिका जाने की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने तेलंगाना हाईकोर्ट के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें आत्महत्या के लिए उकसाने (आईपीसी की धारा 306) के आरोपी को इलाज कराने विदेश जाने की मंजूरी दी गई थी।
विज्ञापन
देश में ही संभव है हर बीमारी का इलाज
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि आरोपी जिन बीमारियों से पीड़ित है, उनका बेहतरीन उपचार भारत के भीतर ही पूरी तरह उपलब्ध है। अदालत ने माना कि सिर्फ मेडिकल ग्राउंड के आधार पर आरोपी को विदेश यात्रा की अनुमति देने का हाईकोर्ट का फैसला तर्कसंगत नहीं था। पीठ ने दो टूक शब्दों में कहा कि मामले की मौजूदा परिस्थितियों, आरोपी के पुराने आचरण और देश के भीतर मौजूद आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं को देखते हुए उसे अमेरिका जाने की इजाजत बिल्कुल नहीं दी जानी चाहिए थी।
व्यक्तिगत स्वतंत्रता और आपराधिक न्याय में संतुलन जरूरी
अदालत ने भारतीय संविधान का हवाला देते हुए एक महत्वपूर्ण कानूनी बात भी सामने रखी। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि विदेश यात्रा का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा जरूर है, लेकिन इसे अकेले नहीं देखा जा सकता। अदालत के मुताबिक, आरोपी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और शिकायतकर्ता के शीघ्र सुनवाई के अधिकार के बीच संतुलन होना चाहिए। इसके साथ ही देश की आपराधिक न्याय प्रणाली के व्यापक हितों को भी ध्यान में रखना बेहद आवश्यक है।
मजिस्ट्रेट कोर्ट की पुरानी शर्तें अब रहेंगी बहाल
इस मामले में अदालती आदेशों का एक लंबा सिलसिला रहा है। सबसे पहले मजिस्ट्रेट अदालत ने आरोपी को उसका पासपोर्ट लौटाते हुए बिना अनुमति विदेश न जाने की सख्त शर्त लगाई थी। इसके बाद सत्र अदालत (सेशन कोर्ट) ने उसे दोबारा पासपोर्ट जमा कराने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट ने सत्र अदालत के फैसले को पलटते हुए आरोपी को कुछ शर्तों के साथ अमेरिका जाने की हरी झंडी दे दी थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला खारिज करते हुए मजिस्ट्रेट अदालत के मूल आदेश को फिर से बहाल कर दिया है।