केरल की वीडी सतीशन सरकार ने पिछली पिनाराई विजयन सरकार में निलंबित किए गए दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारी बी अशोक और एन प्रशांत का निलंबन वापस ले लिया है। अफसरों की कमी के बीच लिए गए इस फैसले से राज्य के प्रशासनिक गलियारे में बड़े फेरबदल की संभावना है।
केरल की राजनीति और नौकरशाही से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर आ रही है। मुख्यमंत्री वीडी सतीशन की सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. बी अशोक और एन प्रशांत का निलंबन रद्द कर दिया है। इन दोनों अधिकारियों को पिछली पिनाराई विजयन सरकार के दौरान सेवा से हटा दिया गया था। अब सरकार के इस फैसले के बाद दोनों अधिकारियों की सेवा में वापसी का रास्ता साफ हो गया है। माना जा रहा है कि सचिवालय में खाली पदों को भरने के लिए सरकार जल्द ही इन्हें नई और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंप सकती है। इस फैसले को पिछली सरकार की दंडात्मक कार्रवाइयों को पलटने के रूप में देखा जा रहा है।
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विजयन सरकार की कार्रवाई को माना गया जरूरत से ज्यादा
केरल सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राज्य में वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की भारी कमी चल रही है। प्रशासनिक समीक्षा में यह पाया गया कि पिछली विजयन सरकार के दौरान अफसरों के खिलाफ शुरू की गई कई अनुशासनात्मक कार्रवाइयां जरूरत से ज्यादा सख्त थीं। बहाल किए गए दोनों अधिकारी पूर्ववर्ती सरकार की नीतियों और शीर्ष अधिकारियों के कामकाज के तौर-तरीकों की खुलकर आलोचना करने के लिए जाने जाते रहे हैं।
बयानबाजी और ट्रांसफर विवादों में घिरे रहे आईएएस अशोक
सैनिक कल्याण विभाग के प्रधान सचिव के रूप में कार्यरत डॉ. बी अशोक को विधानसभा चुनाव के नतीजों से ठीक पहले निलंबित किया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने मीडिया इंटरव्यू में तत्कालीन मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और उनकी सरकार की कार्यशैली पर तीखे सवाल उठाए थे। सरकार ने इसे 'अखिल भारतीय सेवा आचरण नियमों' का उल्लंघन माना था। हालांकि,आईएएस अशोक ने इस कार्रवाई का पुरजोर विरोध किया था। इससे पहले 'केरा प्रोजेक्ट' में कथित अनियमितताओं की रिपोर्ट सामने आने के बाद उनका कृषि विभाग सहित कई महत्वपूर्ण पदों से बार-बार ट्रांसफर भी किया गया था।
नौ बार कार्रवाई झेलने वाले एन प्रशांत की भी वापसी
दूसरे आईएएस अधिकारी एन प्रशांत पिछले करीब दो साल से सेवा से बाहर चल रहे थे। पिछली सरकार के दौरान उनके खिलाफ रिकॉर्ड नौ बार अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई थी। उन्हें पहली बार 11 नवंबर 2024 को तब निलंबित किया गया था, जब उन्होंने पूर्व मुख्य सचिव डॉ. ए जयतिलक के खिलाफ सोशल मीडिया पर सीधे आरोप लगा दिए थे। सोशल मीडिया पर बेहद सक्रिय रहने वाले प्रशांत अक्सर सरकार की कार्रवाइयों का जवाब व्यंग्य और अपनी पोस्ट से देते थे। उन पर आखिरी कार्रवाई बिना इजाजत एक अंग्रेजी अखबार में राज्य की लॉटरी प्रणाली पर लेख लिखने को लेकर हुई थी। अब दोनों की वापसी से केरल के प्रशासनिक महकमे में बड़े बदलाव की उम्मीद है।