सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को पंजाब के विधायक एवं लोक इंसाफ पार्टी के नेता सिमरजीत सिंह बैंस के खिलाफ दुष्कर्म के एक मामले में उनके आचरण पर आपत्ति जताई। सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि बैंस के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज होने के बाद उन्होंने शिकायतकर्ता के खिलाफ कई मामले दर्ज करवाए।
चीफ जस्टिस एनवी रमण की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने बैंस की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी से कहा, क्या आपने अपने मुवक्किल का रवैया देखा है? वह दो बार के विधायक हैं और इस तरह से व्यवहार करते हैं। इस पर रोहतगी ने कहा कि शिकायतकर्ता झूठे मामले दर्ज करा रही थी और नौकरी के रैकेट चलाने में भी शामिल है। हालांकि पीठ ने कहा कि वह शिकायतकर्ता महिला को संरक्षण देगी।
इसके बाद पीठ ने पंजाब के एडवोकेट जनरल डीएस पटवालिया से पूछा, आपके राज्य में क्या हो रहा है? उन्होंने (बैंस) अब तक उस महिला के खिलाफ कितने मामले दर्ज कराए हैं। अब वह अग्रिम जमानत चाहते हैं और यह चाहते हैं कि महिला जेल जाए। राज्य, पुलिस तंत्र के इस तरह के दुरुपयोग के पक्षकार नहीं हो सकता।
महिला के खिलाफ कार्रवाई दो हफ्ते रोकी
इसके बाद पीठ ने इस मामले में पंजाब सरकार को एक हफ्ते में जवाब दाखिल करने के लिए कहा। पीठ ने शिकायतकर्ता महिला के खिलाफ सभी कार्यवाही पर दो हफ्ते के लिए रोक भी लगा दी। पीठ ने विधायक बैंस को भी एक हफ्ते के लिए गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान किया। पीठ एक हफ्ते बाद इस मामले की सुनवाई करेगी।
महिला और बैंस दोनों ने दी है याचिका
शीर्ष अदालत दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। एक याचिका बैंस ने दायर की है जबकि दूसरी शिकायतकर्ता महिला ने। बैंस ने लुधियाना की एक अदालत के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था। कोविड मानदंडों के उल्लंघन और दुष्कर्म के मामले में पेश होने में विफल रहने के कारण उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने शीर्ष अदालत का रुख किया है। वहीं महिला ने अपने खिलाफ दर्ज मुकदमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।