फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गरीबों को आरक्षण: 28 मार्च को याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

Mon, 11 Mar 2019 12:09 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
विज्ञापन

उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि वह इस समय सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लिए 10 फीसदी आरक्षण का मामला संविधान पीठ को सौंपने के बारे में कोई आदेश पारित नहीं करना चाहता।

विज्ञापन


प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने कहा कि इस मामले में 28 मार्च को सुनवाई होगी और तभी विचार किया जाएगा कि क्या इसे संविधान पीठ को सौंपने की आवश्यकता है या नहीं।

याचिकाकर्ता तहसीन पूनावाला की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन से पीठ ने कहा कि वह उन बिंदुओं के बारे में एक संक्षिप्त नोट तैयार करे जो उन्होंने अपने आवेदन में उठाए हैं। शीर्ष अदालत ने इससे पहले सामान्य वर्ग में आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के लिए नौकरियों और शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश के लिये दस फीसदी आरक्षण देने के निर्णय पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। 
विज्ञापन


हालांकि, न्यायालय कांग्रेस समर्थक और कारोबारी तहसीन पूनावाला की याचिका पर दस फीसदी आरक्षण की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर विचार के लिए तैयार हो गया था और उसने इस याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया था और पहले से लंबित याचिकाओं के साथ उसे संलग्न कर दिया था। 

इससे पहले, न्यायालय ने इस आरक्षण की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाले गैर सरकारी संगठन यूथ फॉर इक्वेलिटी और जनहित अभियान की याचिकाओं पर केंद्र को नोटिस जारी किए थे। इन याचिकाओं में संविधान के 103वें संशोधन कानून, 2019 को निरस्त करने का अनुरोध किया गया है।
याचिका में कहा गया है कि यह कानून संविधान के बुनियादी ढांचे का उल्लंघन करता है क्योंकि सिर्फ आर्थिक पिछड़ेपन के आधार पर आरक्षण सामान्य वर्ग तक सीमित नहीं रखा जा सकता है। ।
विज्ञापन

 

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें