तीन तलाक विधेयक पर सुनवाई करने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार किया है
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उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को तीन तलाक विधेयक को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया। फरवरी में तीन तलाक विधेयक को कैबिनेट की मंजूरी मिली थी। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के नेतृत्व वाले तीन जजों की बेंच ने वकील रीपक कंसल की याचिका को खारिज कर दिया।
इस बेंच में जस्टिस दीपक गुप्ता और संजीव खन्ना भी शामिल थे। फरवरी में बजट सत्र के दौरान तीन तलाक विधेयक लोकसभा में पास हो गया था लेकिन राज्यसभा में अटक गया था क्योंकि उच्च सदन अनिश्चितकाल के लिए भंग हो गई थी। पिछले साल संसद में तीन तलाक के मुद्दे को उस समय उठाया गया था जब उच्चतम न्यायालय की पांच सदस्यीय बेंच ने इस प्रथा को असंवैधानिक करार दिया था।
मुस्लिम समाज में जारी इस प्रथा में पति केवल तीन बार तलाक शब्द कहकर अपनी पत्नी को तलाक दे देता है। अदालत ने इस प्रथा को गैर इस्लामिक और मनमाना करार देते हुए इस बात को मानने से इनकार कर दिया था कि तीन तालक धार्मिक अभ्यास का एक अभिन्न अंग है। सोमवार को न्यायमूर्ति गोगोई ने कहा, 'अगर राज्यसभा में कोई बिल पारित नहीं होता है और सदन भंग हो जाती है तो बहुत कुछ नहीं कर सकते।'