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Supreme Court: कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग से जुड़ी अर्जी पर होगी सुनवाई, अब मामले को 28 नवंबर को सुना जाएगा

Mon, 17 Oct 2022 10:24 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

संविधान पीठों की कार्यवाही को लाइव स्ट्रीम करने का निर्णय अदालत द्वारा 20 सितंबर 2022 को लिया गया था और इसके तुरंत बाद रजिस्ट्री द्वारा ट्रायल रन किया गया था। आइए पढ़ते हैं सुप्रीम कोर्ट की अहम खबरें...
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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प्रधान न्यायाधीश जस्टिस यूयू ललित और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने कहा कि कोर्ट ने अपनी संविधान पीठों की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग के लिए कदम उठाए हैं। यह भी तय किया गया है कि इस अनुभव से सीखकर इसका दायरा बढ़ाया जा सकता है। पीठ ने कहा कि हमें कहीं से शुरुआत करनी थी, इसलिए हमने संविधान पीठों के साथ शुरुआत की। पीठ ने अंतरिम आवेदन पर नोटिस जारी किया और कोर्ट के महासचिव  समेत अन्य से जवाब मांगा। अगली सुनवाई 28 नवंबर को होगी।

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पूर्व विचारक केएन गोविंदाचार्य की ओर से पेश वकील विराग गुप्ता ने कहा कि याचिकाकर्ता कार्यवाही के सीधे प्रसारण का समर्थन करता है। हालांकि, यह इस मुद्दे पर शीर्ष कोर्ट के फैसले के अनुसार किया जाना चाहिए। इस पर पीठ ने कहा कि यह सब ठीक है। हमने शुरुआत में संविधान पीठों से कार्यवाही के सीधे प्रसारण के लिए कदम उठाए हैं और फिर इसे आगे तीन-न्यायाधीशों की पीठ तक ले जाया जा सकता है। आप जो सुझाव दे रहे हैं, वह निश्चित रूप से अच्छा है। हम इससे बेखबर नहीं हैं।

गोविंदाचार्य की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि सीधा प्रसारण का कॉपीराइट यूट्यूब जैसे निजी मंचों को नहीं सौंपा जा सकता। दरअसल, संविधान पीठों की कार्यवाही को लाइव स्ट्रीम करने का निर्णय अदालत द्वारा 20 सितंबर 2022 को लिया गया था और इसके तुरंत बाद रजिस्ट्री द्वारा ट्रायल रन किया गया था। इसके बाद 27 सितंबर को भारतीय न्यायपालिका ने जनता के देखने के लिए यूट्यूब पर अपनी कार्यवाही का सीधा प्रसारण किया था।
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गोविंदाचार्य की ओर से पेश वकील विराग गुप्ता ने 26 सितंबर को तत्काल सुनवाई के लिए अर्जी का उल्लेख किया था। उन्होंने यूट्यूब के उपयोग की शर्तों का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि इस निजी मंच को कार्यवाही का कॉपीराइट भी प्राप्त होता है, यदि वे इस पर वेबकास्ट होते हैं। वकील ने 2018 के एक फैसले का जिक्र करते हुए कहा था कि यह व्यवस्था दी गई थी कि इस अदालत में दर्ज और प्रसारित सभी सामग्री पर कॉपीराइट केवल इस अदालत के पास होगा।

सेंट स्टीफंस की अर्जी पर भी सुनवाई 
इस बीच शीर्ष कोर्ट दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ सेंट स्टीफंस कॉलेज की अर्जी पर सोमवार को सुनवाई करेगा, जिसमें उसे दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) की दाखिला नीति का पालन करने को कहा गया था। चीफ जस्टिस ललित ने अपनी प्रशासनिक क्षमता में, अल्पसंख्यक संस्थान के मामले को जस्टिस अजय रस्तोगी और न्यायमूर्ति सीटी रविकुमार की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है। जस्टिस संजय किशन कौल ने खुद को संस्थान का पूर्व छात्र बताते हुए 10 अक्तूबर को मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था।

इससे पहले दिल्ली उच्च न्यायालय ने 12 सितंबर को सेंट स्टीफंस को डीयू द्वारा तैयार की गई प्रवेश नीति का पालन करने के लिए कहा था। नीति के मुताबिक, अपने स्नातक पाठ्यक्रमों में गैर-अल्पसंख्यक छात्रों के लिए प्रवेश देते समय विश्वविद्यालयीन सामान्य प्रवेश परीक्षा (सीयूईटी)-2022 के स्कोर को 100 प्रतिशत वेटेज देना होता है। कोर्ट ने कहा था कि कॉलेज गैर-अल्पसंख्यक श्रेणी के छात्रों के लिए साक्षात्कार आयोजित नहीं कर सकता है। दाखिला केवल सीयूईटी स्कोर के हिसाब से ही होना चाहिए।

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