सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर भारत निर्वाचन आयोग के कामकाज की जांच के लिए पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति बनाने की मांग की गई है। साथ ही, चुनाव प्रचार में धार्मिक पहचान और हेट स्पीच के इस्तेमाल पर रोक लगाने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है।
देशभर में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन के बीच सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई है। इसमें भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के कामकाज में कथित संस्थागत कमियों की जांच के लिए एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की गई है। इस समिति की अध्यक्षता भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश या सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश द्वारा किए जाने का सुझाव दिया गया है। अधिवक्ता विशाल तिवारी द्वारा दायर इस याचिका में यह निर्देश देने की भी मांग की गई है कि चुनाव आयोग उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों को चुनाव प्रचार के दौरान धार्मिक पहचान का इस्तेमाल करने, धार्मिक प्रतीकों को प्रदर्शित करने या नफरत भरे भाषणों (हेट स्पीच) सहित सांप्रदायिक और गुटीय अपील करने से रोके।
बता दें कि हाल के दिनों में एसआईआर को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है। एक दिन पहले ही तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने एसआईआर को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने एसआईआर के जरिए देश में दो तरह के नागरिक बनाने की कोशिश का आरोप लगाया। (एक वे, जिन्हें वोट देने का अधिकार होगा और दूसरे वे, जिनका नाम मतदाता सूची से हटने के कारण मतदान का अधिकार छिन सकता है।) रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के जरिए वोट हटाकर चुनाव जीतने की साजिश की जा रही है।
शुक्रवार को हैदराबाद में कांग्रेस विधायकों और अन्य नेताओं की बैठक को संबोधित करते हुए सीएम रेवंत रेड्डी ने एसआईआर के खिलाफ विपक्षी गठबंधन इंडिया की मुहिम का समर्थन किया। उन्होंने सीईसी ज्ञानेश कुमार पर भी निशाना साधा और मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने का आरोप लगाया। रेवंत रेड्डी ने इस विवाद की तुलना आजादी की लड़ाई के दौरान साइमन कमीशन के विरोध से की। उस समय ‘साइमन वापस जाओ’ का नारा दिया गया था। इसी तर्ज पर उन्होंने ‘ज्ञानेश वापस जाओ’ का नारा दिया और कांग्रेस कार्यकर्ताओं से इस मुद्दे पर आंदोलन तेज करने की अपील की