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Supreme Court : संविधान पीठ को भेजी जा सकती हैं उपासना स्थल कानून से जुड़ीं याचिकाएं

Sat, 10 Sep 2022 06:28 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

कोर्ट ने कहा कि यह मामला 11 अक्तूबर से तीन जजों की पीठ सुनेगी और सभी पक्ष अधिकतम पांच पृष्ठों में अपने अनुरोध उससे पहले दाखिल कर दें। अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 12 मार्च को केंद्र सरकार से प्रतिक्रिया मांगी थी लेकिन केंद्र सरकार ने अबतक कोई जवाब नहीं दिया है।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि उपासना स्थल कानून, 1991 के कुछ प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाएं पांच जजों की संविधान पीठ को भेजी जा सकती हैं। हालांकि फिलहाल मामला तीन सदस्यीय पीठ ही सुनेगी। कानून के यह प्रावधान धर्मस्थलों की प्रकृति में 15 अगस्त 1947 के वक्त की स्थिति में किसी भी बदलाव को प्रतिबंधित करते हैं।

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साथ ही किसी धर्मस्थल को फिर से हासिल करने के लिए कानूनी याचिका दायर करने से भी रोकते हैं। शीर्ष कोर्ट ने इन याचिकाओं पर जवाब दाखिल करने के लिए केंद्र सरकार को दो सप्ताह का समय दिया है। एक याचिकाकर्ता भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने शीर्ष अदालत से कुछ प्रावधानों को रद्द करने की मांग की है ताकि हिंद वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर फिर से दावा कर सकें।

हालांकि एक अन्य याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने पूरे कानून को ही असांविधानिक घोषित करने की मांग की है।मुख्य न्यायाधीश जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस एस रवींद्र भट और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने जमीयल उलेमा ए हिंद समेत सभी आवेदकों को उपासना स्थल कानून, 1991 को चुनौती देने वाली याचिकाओं में हस्तक्षेप करने की अनुमति भी दे दी है।
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कोर्ट ने कहा कि यह मामला 11 अक्तूबर से तीन जजों की पीठ सुनेगी और सभी पक्ष अधिकतम पांच पृष्ठों में अपने अनुरोध उससे पहले दाखिल कर दें। अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 12 मार्च को केंद्र सरकार से प्रतिक्रिया मांगी थी लेकिन केंद्र सरकार ने अबतक कोई जवाब नहीं दिया है। शुक्रवार को पीठ ने जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से इस बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार मामले में जवाब दाखिल करेगी।

उपाध्याय और स्वामी के अलावा मामले में काशी नरेश की बेटी महाराजा कुमारी कृष्ण प्रिया,पूर्व सांसद चिंतामणि मालवीय, पूर्व सैन्य अधिकारी अनिल कबोतरा, वकील चंद्रशेखर, वाराणसी के निवासी रूद्र विक्रम सिंह, धर्मगुरु स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती, मथुरा निवासी देवकीनंदन ठाकुर समेत कई लोगों ने इस कानून को चुनौती दी है।

वैवाहिक दुष्कर्म मामले में सुप्रीम सुनवाई 16 को
सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक दुष्कर्म को अपराध ठहराने के बारे में दिल्ली हाईकोर्ट के खंडित आदेश के बारे में दायर याचिकाओं पर 16 सितंबर को सुनवाई करने की मंजूरी दे दी है। हाईकोर्ट ने 11 मई को खंडित फैसला दिया था, जिसमें एक जज पक्ष में थे कि पत्नी की इच्छा के बिना यौन संबंध बनाए जाने पर पति को अभियोजन से छूट देने वाले कानून को रद्द किया जाए। वहीं, दूसरे जज इसे असांविधानिक मानने के पक्ष में नहीं थे। दोनों याचिकाएं शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अजय रस्तोगी और बीवी नागरत्ना की पीठ के सामने आईं। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा, शीर्ष कोर्ट कानून से जुड़े सवालों पर फैसला करे। पीठ ने कहा कि मामले को सुना जाना चाहिए।

क्रिप्टोकरेंसी पर कानून बनाने से नहीं रोक सकते
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह सरकार को क्रिप्टोकरेंसी पर संसद में कानून लाने से नहीं रोक सकता। पीठ ने एक निजी कंपनी की तरफ से दायर याचिका को गलत सोच वाला बताते हुए खारिज कर दिया। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने कहा, याचिका का कोई आधार नहीं है। याचिका में क्रिप्टोकरेंसी पर सुझाव देने के लिए अंतर-मंत्रालयी समिति बनाने के फैसले को चुनौती दी गई थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कहा कि वित्त मंत्री ने बजट भाषण में क्रिप्टोकरेंसी को वैध मुद्रा नहीं माना था, पर अब सरकार इसके लिए एक कानून लाने की बात कह रही है।

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