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Supreme Court: तलाक-ए-हसन के खिलाफ याचिका, सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार

Wed, 25 May 2022 10:57 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

एक मुस्लिम महिला ने अधिवक्ता अश्विनी कुमार दुबे के माध्यम से याचिका दायर की है और केंद्र से लिंग एवं धर्म से इतर सभी नागरिकों के लिए तलाक की एक समान प्रक्रिया का दिशानिर्देश तैयार करने की भी मांग की है।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को तलाक-ए-हसन के खिलाफ याचिका याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया। याचिका में तलाक-ए-हसन की प्रथा और एकतरफा न्यायेतर तलाक के अन्य सभी रूपों को मनमाना और तर्कहीन करार देने की मांग की गई है। इसके साथ ही याचिका में इसे अमान्य एवं असंवैधानिक घोषित करने की मांग भी की गई है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की अवकाशकालीन पीठ ने मामले का उल्लेख करने वाले वकील से कहा कि वह अगले सप्ताह पीठ के समक्ष इसे रखें।

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'तलाक-ए-हसन' के अंतर्गत तलाक को महीने में एक बार, तीन महीने तक बोला जाता है। यदि इस अवधि के दौरान साथ रहना फिर से शुरू नहीं किया जाता है, तो तीसरे महीने में तीसरी बार ‘तलाक’ कह देने के बाद तलाक को औपचारिक मान्यता मिल जाती है। हालांकि, यदि पहले या दूसरे महीने में 'तलाक' शब्द के उच्चारण के बाद पति-पत्नी का साथ रहना फिर से शुरू हो जाता है, तो यह माना जाता है कि दोनों पक्षों में सुलह हो गई है।

एक मुस्लिम महिला ने अधिवक्ता अश्विनी कुमार दुबे के माध्यम से याचिका दायर की है और केंद्र से लिंग एवं धर्म से इतर सभी नागरिकों के लिए तलाक की एक समान प्रक्रिया का दिशानिर्देश तैयार करने की भी मांग की है। वरिष्ठ अधिवक्ता पिंकी आनंद ने मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने के लिए पीठ के समक्ष उल्लेख किया और बताया कि याचिका 'तलाक-ए-हसन' को चुनौती देने से संबंधित है।
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उन्होंने कहा कि वकील के माध्यम से याचिकाकर्ता को 'तलाक-ए-हसन' के लिए दो नोटिस जारी किए जा चुके हैं और तीसरा नोटिस अंतिम होगा। पीठ ने पूछा कि नोटिस कब जारी किया गया था? इसके जवाब में वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि पहला नोटिस 19 अप्रैल को और दूसरा अब जारी किया गया है। पीठ ने कहा कि हम पुन: खुलने के बाद इस मामले को रखेंगे। कोई जल्दबाजी नहीं है। इस पर वकील ने कहा कि तब तक तो सब कुछ खत्म हो जाएगा।

सहारा समूह की कंपनियों की जांच में रोक के खिलाफ अर्जी पर सुनवाई आज
सुप्रीम कोर्ट सहारा समूह की नौ कंपनियों के खिलाफ जांच रोकने वाले दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) की याचिका पर बृहस्पतिवार को सुनवाई करेगा। बुधवार को यह मामला जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की अवकाश पीठ के समक्ष आया। सहारा समूह की कंपनियों के वकील ने पीठ को बताया कि वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल उनको लीड कर रहे हैं और वह शहर से बाहर हैं। बृहस्पतिवार को वह उपस्थित होंगे, इसलिए मामले की सुनवाई एक दिन के लिए स्थगित कर दें। एसएफआईओ की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी उनकी अपील का विरोध नहीं किया। जिसके बाद पीठ ने कहा, हम इस मामले पर बृहस्पतिवार को सुनवाई करेंगे।

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