सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक अंतरिम आदेश में बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश पर यथास्थिति बरकरार रखने का निर्देश दिया। इसमें ऑनलाइन टैक्सी सुविधा प्रदान करने वाली उबर इंडिया को केंद्र सरकार की ओर से जारी मोटर वाहन एग्रीगेटर (एमवीए) दिशानिर्देशों का पालन करने के लिए कहा गया था।
न्यायाधीश एल नागेश्वर राव और बीआर गवई की पीठ ने उबर इंडिया सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दाखिल एक अपील पर केंद्र, सड़क परिवहन मंत्रालय और अन्य को नोटिस भी जारी किया। यह याचिका हाईकोर्ट की ओर से जारी सात मार्च के आदेश के खिलाफ है।
उबर इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट का रुख हाईकोर्ट के उस आदेश के बाद किया है जिसमें कैब संचालकों को एमवीए दिशानिर्देशों का पालन करने के लिए कहा गया है। कंपनी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु संघवी ने तर्क दिया कि कंपनी को दिशानिर्देशों की वैधता पर गंभीर आपत्ति है। इनमें से कई दिशानिर्देश काम करने योग्य नहीं हैं।
इस मुद्दे को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के समक्ष उठाया गया है, इसलिए उबर ने अभी तक दिशानिर्देशों के तहत लाइसेंस के लिए आवेदन नहीं किया है। हालांकि हाईकोर्ट ने गाइडलाइंस को लागू करने का आदेश पारित किया था।
सिंघवी ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से कैब एग्रीगेटर्स के संबंध में अपने दिशानिर्देशों को अंतिम रूप दिया जाना अभी बाकी है। एग्रीगेटर्स को लाइसेंस जारी करने के लिए सक्षम अधिकारियों को अधिसूचित किए जाने का काम भी अभी बाकी है।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि महाराष्ट्र में संचालन कर रहीं ओला और उबर जैसी एप आधारित कंपनियां बिना वैध लाइसेंस के काम कर रही हैं। अदालत ने ऐसे सभी कैब संचालकों को वैध लाइसेंस के लिए 16 मार्च तक आवेदन करने का निर्देश दिया था।