दरअसल, शाहीन बाग मामले की याचिकाओं से संबंधित सुनवाई का निपटारे के दौरान पीठ और दिल्ली पुलिस की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के बीच तीखी तकरार भी हुई। दरअसल जस्टिस जोसेफ ने कहा कि वह हिंसा मामले में कुछ कहना चाहते हैं। इस पर मेहता ने कहा, पीठ को हिंसा पर कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे पुलिस का मनोबल गिरेगा। हमें मालूम है कि हम किन हालातों में काम कर रहे हैं। एक हेड कांस्टेबल की मृत्यु हो गई है। डीसीपी वेंटीलेटर पर हैं।
मन की बात नहीं कहूंगा तो जज के रूप में विफल हो जाऊंगा : जस्टिस जोसेफ
तब जस्टिस जोसेफ ने कहा, संस्था के प्रति अपने भरोसे को देखते हुए ही मैं कोई टिप्पणी करूंगा। उन्होंने कहा, अगर मैं इस मुद्दे पर अपने मन की बात नहीं कहूंगा तो मैं संस्था के प्रति और एक न्यायाधीश के रूप में अपने सांविधानिक कर्तव्य में विफल हो जाऊंगा। जस्टिस जोसेफ ने कहा, आप मुझे गलत नहीं समझे। मैंने यह टिप्पणी व्यापक परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखते हुए की है। पीठ ने कहा, वह दिल्ली पुलिस के खिलाफ नहीं है, मगर उसकी यह टिप्पणी दूरगामी प्रभाव वाली है। सरकारी एजेंसियों को माहौल को अनुकूल बनाना चाहिए।