आपराधिक मामलों में फैसलों को ज्यादा स्पष्ट, पढ़ने में आसान और समझने योग्य बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की ट्रायल अदालतों को कई अहम निर्देश जारी किए हैं। शीर्ष अदालत ने कहा है कि आपराधिक मुकदमों में दिए जाने वाले फैसलों की भाषा और संरचना ऐसी होनी चाहिए, जिससे सबूतों, गवाहों और दस्तावेजों को आसानी से समझा जा सके। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि फैसले केवल कानूनी औपचारिकता न हों, बल्कि उनमें मामले की पूरी तस्वीर साफ तौर पर सामने आए।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब सभी ट्रायल अदालतों को आपराधिक मामलों के फैसले के अंत में एक तालिका यानी चार्ट जोड़ना होगा। इस चार्ट में यह साफ लिखा होगा कि कितने गवाह पेश हुए, कौन-कौन से दस्तावेज रखे गए और कौन-कौन से भौतिक साक्ष्य अदालत के सामने आए। अदालत का मानना है कि इससे न केवल फैसलों की गुणवत्ता सुधरेगी, बल्कि ऊपरी अदालतों को भी अपील की सुनवाई में आसानी होगी।
फैसलों में होगी एक समान व्यवस्था
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि आपराधिक फैसलों में अब एक समान और तय ढांचा अपनाना जरूरी है। अदालत ने कहा कि फैसले के अंत में जो चार्ट जोड़ा जाएगा, वह फैसले का परिशिष्ट या अंतिम हिस्सा होगा। यह चार्ट साफ, व्यवस्थित और आसानी से समझ आने वाला होना चाहिए। अदालत ने साफ कहा कि इसका मकसद सबूतों को क्रमबद्ध तरीके से पेश करना है, ताकि रिकॉर्ड को जल्दी और सही ढंग से समझा जा सके।
ये भी पढ़ें- 'अमीरों की जीवनशैली के चलते मुश्किलें झेलते हैं गरीब', दिल्ली-NCR की जहरीली हवा पर कोर्ट सख्त
गवाहों की पूरी जानकारी जरूरी
शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया कि हर आपराधिक फैसले में गवाहों का अलग चार्ट बनाया जाए। इसमें क्रम संख्या, गवाह का नाम और उसकी भूमिका का संक्षिप्त विवरण दिया जाएगा। जैसे कोई सूचनाकर्ता है, प्रत्यक्षदर्शी है, डॉक्टर है या कोई अन्य महत्वपूर्ण गवाह। अदालत ने कहा कि विवरण छोटा हो, लेकिन इतना हो कि गवाह की भूमिका साफ हो जाए। इससे यह समझने में आसानी होगी कि किस गवाह की गवाही किस तरह की है और उसका महत्व क्या है।
दस्तावेजों के लिए अलग चार्ट
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि मुकदमे के दौरान पेश किए गए सभी दस्तावेजों के लिए अलग से एक तालिका तैयार की जाए। इसमें दस्तावेज का नंबर, उसका संक्षिप्त विवरण और यह भी लिखा जाए कि किस गवाह ने उस दस्तावेज को साबित किया या उस पर गवाही दी। अदालत ने माना कि कई मामलों में दस्तावेजों की संख्या ज्यादा होती है और बिना व्यवस्थित सूची के उन्हें समझना मुश्किल हो जाता है।
जटिल मामलों में व्यावहारिक तरीका
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि साजिश, आर्थिक अपराध या ऐसे मामलों में जहां गवाहों और दस्तावेजों की संख्या बहुत ज्यादा हो, वहां ट्रायल अदालतें केवल जरूरी और भरोसेमंद गवाहों व दस्तावेजों का ही चार्ट बना सकती हैं। हालांकि, यह साफ लिखा जाएगा कि चार्ट में केवल उन्हीं गवाहों और दस्तावेजों को शामिल किया गया है, जिन पर अदालत ने भरोसा किया है। अदालत ने कहा कि इसका उद्देश्य यह है कि चार्ट उपयोगी बने रहें और बेवजह बोझिल न हों।
मामले की सुनवाई के दौरान आई टिप्पणी
ये निर्देश एक ऐसे मामले की सुनवाई के दौरान दिए गए, जिसमें चार साल की बच्ची के यौन उत्पीड़न के आरोप में दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति की सजा को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि इस मामले में दर्ज एफआईआर में बुनियादी जानकारी तक नहीं थी। जबकि सूचनाकर्ता ने घटना की पूरी जानकारी होने का दावा किया था, फिर भी न तो आरोपी के नाम साफ थे और न ही कथित गवाहों का उल्लेख था। अदालत ने कहा कि ऐसी खामियों के चलते न्यायिक प्रक्रिया कमजोर पड़ती है और इसी कारण ट्रायल अदालतों को अधिक जिम्मेदारी और स्पष्टता के साथ फैसले लिखने की जरूरत है।
अन्य वीडियो-