तीन नए कृषि कानूनों व किसान आंदोलन के मुद्दे पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने जहां केंद्र सरकार को फटकारा वहीं किसानों से भी पूछा कि क्या वे रास्ता छोड़ने का तैयार हैं। कोर्ट ने केंद्र सरकार से साफ शब्दों में कहा कि हमें पता नहीं है कि सरकार इन कानूनों को लेकर कैसे डील कर रही है। मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे ने सरकार से कहा, 'अगर आप में समझ है तो इन कानूनों पर अमल ना करें। हम इनके अमल पर रोक लगाने जा रहे हैं, क्या किसान रास्ता छोड़ेंगे।'
कोर्ट ने सरकार को यूं फटकारा
किसानों से कोर्ट ने यह कहा-
अटॉर्नी जनरल वेणुगोपाल ने कहा-कानून पर रोक नहीं लगा सकती कोर्ट
देश के सबसे बड़े सरकारी वकील वेणुगोपाल ने जिरह में कहा-अदालतों का इतिहास रहा है कि वो कानून पर रोक नहीं लगा सकती।
कोर्ट तब तक संसद के कानून पर रोक नहीं लगा सकती, जब तक कानून विधायी क्षमता के बिना पारित हुआ हो या फिर कानून मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता हो।
वेणुगोपाल व कोर्ट के सवाल-जवाब
किसानों के वकील दुष्यंत दवे ने कहा-रामलीला मैदान में जाने दें
हरीश साल्वे व कोर्ट की दलीलें
15 जनवरी को है सरकार-किसानों की अगली वार्ता
बता दें, केंद्र और किसान संगठनों के बीच सात जनवरी को हुई आठवें दौर की बातचीत में भी कोई समाधान निकलता नजर नहीं आया क्योंकि केंद्र ने विवादास्पद कानून निरस्त करने से इनकार कर दिया था जबकि किसान नेताओं ने कहा था कि वे अंतिम सांस तक लड़ाई लड़ने के लिये तैयार हैं और उनकी “घर वापसी” सिर्फ “कानून वापसी” के बाद होगी। केंद्र और किसान नेताओं के बीच 15 जनवरी को अगली बैठक प्रस्तावित है।