फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Supreme Court: जबरन तेजाब पिलाने वाले दरिंदो पर 'सुप्रीम' सख्ती, कहा- ऐसे जघन्य मामलों में हत्या का मुकदमा चले

Thu, 11 Dec 2025 04:51 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Supreme Court on Acid Attackers: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जबरन एसिड पिलाने वाले आरोपियों पर हत्या के प्रयास की धारा के तहत मामला चलना चाहिए। कोर्ट ने इसे बेहद घिनौना और समाज के लिए खतरा बताते हुए कहा कि ऐसे लोगों को कोई रियायत नहीं मिलनी चाहिए।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट (फाइल तस्वीर) - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि जिन मामलों में आरोपी पीड़ित को जबरन एसिड पिलाते हैं, उन्हें हत्या के प्रयास की धारा के तहत ही ट्रायल का सामना करना पड़ेगा। कोर्ट ने इसे बेहद अमानवीय और समाज के लिए खतरा बताकर कड़ी टिप्पणी की।

विज्ञापन


यह टिप्पणी उस पीआईएल की सुनवाई के दौरान आई, जिसे 2009 की एसिड अटैक सर्वाइवर और ‘ब्रेव सोल्स फाउंडेशन’ की संस्थापक शाहीन मलिक ने दायर किया था। याचिका में मांग की गई थी कि जोर-जबरदस्ती से एसिड पिलाई गई पीड़िताओं को भी 'एसिड अटैक पीड़ित' की परिभाषा में शामिल किया जाए।

हत्या के प्रयास के तहत ट्रायल जरूरी
सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की पीठ ने कहा कि ऐसे मामलों पर किसी भी तरह का दूसरा विचार नहीं होना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 307 (हत्या का प्रयास) यानी अब बीएनएस की धारा 109 के तहत ही ऐसे अपराधों का ट्रायल होना चाहिए।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें- रोहिणी कोर्ट में लूथरा भाइयों की अग्रिम जमानत पर फैसला सुरक्षित, शाम पांच बजे आएगा आदेश

ऐसे दरिंदे समाज के लिए खतरा
सीजेआई ने टिप्पणी की कि यह अपराध न सिर्फ जघन्य है बल्कि इन लोगों को समाज में खुला घूमने का हक नहीं। उन्होंने कहा कि ऐसे आरोपी समाज, नागरिकों और कानून-व्यवस्था के लिए खतरा होते हैं और कानून में विशेष अपवाद जोड़ने की भी जरूरत है।

याचिका में क्या कहा गया?
याचिका में कहा गया कि जिन पीड़ितों को जबरन एसिड पिलाया जाता है, उनकी हालत सामान्य एसिड अटैक पीड़ित से भी ज्यादा गंभीर होती है। इसलिए उन्हें विकलांगता कानून (RPwD Act) में स्पष्ट रूप से ‘एसिड अटैक पीड़ित’ के तौर पर मान्यता दी जानी चाहिए।
विज्ञापन


सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संकेत दिया कि कानून में बदलाव की जरूरत पर भी विचार हो सकता है। कोर्ट ने कहा कि सबसे घिनौने और अमानवीय मामलों में सख्त सजा का प्रावधान जरूरी है। आगे की सुनवाई में सरकार से विस्तृत जवाब मांगा जाएगा।


अन्य वीडियो-

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें