सुप्रीम कोर्ट ने प्रमोशन में आरक्षण से जुड़े मामले पर उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। इस साल अप्रैल में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के 5 सितंबर, 2012 के शासनादेश को निरस्त कर दिया था, जिससे राज्य में आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों व अधिकारियों के लिए प्रमोशन में आरक्षण का रास्ता साफ हो गया था।
जस्टिस एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोमवार को कुंवर सिंह मेवाड़ की याचिका पर सरकार के अलावा उस शख्स को भी नोटिस जारी किया है जिसकी याचिका पर हाईकोर्ट ने एक अप्रैल को फैसला दिया था। बता दें कि राज्य सरकार में हाईकोर्ट के आदेश के बाद 11 सितंबर को एक शासनादेश जारी कर कहा था कि उसने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर कर दी है और जब तक इस पर फैसला नहीं आ जाता तब तक राज्य में किसी भी तरह का प्रमोशन नहीं होगा।
याचिकाकर्ता मेवाड़ की ओर से पेश वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार व कुमार परिमल ने पीठ से कहा कि उनके मुवक्किल 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं, लिहाजा इस पर जल्द निपटारा किया जाए। लिहाजा पीठ ने कहा कि सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए 19 नवंबर को इस पर सुनवाई करने का निर्णय लिया है।
मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर, 2018 में जरनैल सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रमोशन में आरक्षण पर मुहर लगा दी गई थी और इसी आधार पर आरक्षित वर्ग के एक अधिकारी ने हाईकोर्ट ने 2012 के शासनादेश को चुनौती दी थी।