ओला, उबर, जोमैटो, स्विगी जैसे ऑनलाइन फूड डिलीवरी, कूरियर व टैक्सी एग्रीगेटर्स एप के नियोजित कामगारों के सामाजिक सुरक्षा अधिकारों की मांग वाली रिट याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र व अन्य को नोटिस जारी कर उनका पक्ष मांगा है।
जस्टिस एल नागेश्वर राव की पीठ ने इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स (आईएफएटी) की याचिका को सुनवाई के लिए मंजूर कर लिया है। याचिकाकर्ता संगठन की वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा, यह घोषित किया जाना चाहिए कि ड्राइवर या डिलीवरी कर्मचारी वास्तव में ‘कामगार’ है। दुनिया भर में उबर के लिए उन्हें ‘कामगार’ माना जाता है। इस पर पीठ ने बताया कि पिछले साल संसद से पारित नए कानून सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 में ‘कामगार’ के कल्याण के लिए समर्पित एक अध्याय है।
बहरहाल पीठ ने केंद्र को चार हफ्ते में अपना पक्ष रखने के लिए कहा है। याचिका में इन कामगारों के लिए कल्याणकारी योजनाएं बनाने, जैसे स्वास्थ्य बीमा, मातृत्व लाभ, पेंशन लाभ, बुजुर्ग होने पर सहयोग और विकलांगता होने पर अनुग्रह राशि की व्यवस्था की मांग की गई। साथ ही उनका टीकाकरण प्राथमिकता के तौर पर कंपनी द्वारा करवाया जाना चाहिए।