दोषी साबित होने पर तत्काल प्रभाव से सांसद या विधायक को अयोग्य ठहराए जाने की गुहार संबंधी याचिका पर सुप्रीम ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया गया है। शीर्ष अदालत ने पूछा है कि दोषी ठहराए जाने के बाद सांसद या विधायक को सीधे अयोग्य क्यों नहीं ठहराया जाता, उसके लिए सचिवालय द्वारा अधिसूचना जारी करने की क्या आवश्यकता है।
चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने सरकार और चुनाव आयोग से पूछा है कि जब शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कह रखा है कि आपराधिक मामले में अगर किसी विधायक या सांसद को दोषी ठहराने के बाद स्वत: वह अयोग्य हो जाएंगे, ऐसे में सचिवालय के द्वारा उनकी अयोग्यता पर मुहर लगाने के लिए अधिसूचना जारी करने की क्या आवश्यकता है?
अदालत लोक प्रहरी नामक गैर सरकारी संगठन और वकील लिली थॉमस की याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में यह शिकायत की गई है कि 2013 के सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश में सही तरीके से अमल नहीं किया जा रहा है।
जिसमें कहा गया था कि अगर किसी सांसद या विधायक को उस अपराध में दोषी ठहराया जाता है अगर उसमें दो वर्ष या उससे अधिक सजा का प्रावधान है, तो वह स्वत: ही अयोग्य हो जाएगा।