सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस के सत्तारूढ़ गठबंधन में होने के बावजूद विपक्ष के नेता के पद का आनंद लेने पर एक याचिका पर महाराष्ट्र सरकार और ग्रेटर मुंबई नगर निगम के महापौर को नोटिस जारी किया है। चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी रामसुब्रमण्यम की पीठ ने भाजपा पार्षद प्रभाकर तुकाराम शिंदे की याचिका पर सरकार और नगर निकाय से जवाब मांगा है।
याचिकाकर्ता के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि शिवसेना के साथ भाजपा का पहले करार था, जो अब नहीं है। इसलिए विपक्ष में सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते, भाजपा को सांविधानिक रूप से नेता प्रतिपक्ष का पद मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सत्ताधारी गठबंधन में शामिल होने के बावजूद कांग्रेस पार्टी ने विपक्ष के नेता के पद पर कब्जा किया हुआ है। शिंदे ने कहा है कि उन्हें विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता देने का निर्देश दिया जाना चाहिए। नगर निगम में शिवसेना के 84 पार्षद, भाजपा के 82, कांग्रेस के 31, राकांपा के नौ, मनसे के सात और सपा के छह पार्षद हैं।