सौमेंदु अधिकारी भी भाजपा नेता हैं। उन्हें 31 जनवरी, 2023 को पुरबा मेदिनीपुर के कोंटाई स्थित रंगमती श्मशान भूमि में 14 दुकानों के आवंटन के दौरान कथित रूप से धन की हेराफेरी करने के मामले में पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा किसी भी संभावित बलपूर्वक कार्रवाई के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा संरक्षित किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली ममता सरकार की एक याचिका शुक्रवार को खारिज कर दिया। ममता सरकार की याचिका में कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें भाजपा नेता शुवेंदु अधिकारी के भाई सौमेंदु अधिकारी को भ्रष्टाचार के एक मामले में गिरफ्तारी से बचाया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिका में अब हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है क्योंकि चार्जशीट दायर की जा चुकी है।
विज्ञापन
सौमेंदु अधिकारी भी भाजपा नेता हैं। उन्हें 31 जनवरी, 2023 को पुरबा मेदिनीपुर के कोंटाई स्थित रंगमती श्मशान भूमि में 14 दुकानों के आवंटन के दौरान कथित रूप से धन की हेराफेरी करने के मामले में पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा किसी भी संभावित बलपूर्वक कार्रवाई के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा संरक्षित किया गया है। यह मामला उस दौर का है जब वह कोंटाई नगर निकाय के अध्यक्ष थे।
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने इस तथ्य पर ध्यान दिया कि अब चार्जशीट दायर की जा चुकी है और स्थानीय अदालत ने इस मामले में संज्ञान लिया है। अदालत ने कहा कि इसलिए हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की याचिका पर निर्णय लेने की कोई आवश्यकता नहीं है।
विज्ञापन
पीठ ने अपने आदेश में कहा, हाईकोर्ट के 31 जनवरी, 2023 के आक्षेपित आदेश के अनुसरण में यह सामान्य आधार है कि आरोपपत्र 21 फरवरी, 2023 को सक्षम अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया था और 22 मार्च को संज्ञान लिया गया है। इस मामले को देखते हुए विशेष अनुमति याचिका के जरिये इस स्तर पर हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। इसलिए विशेष अनुमति याचिका खारिज की जाती है।
हाईकोर्ट ने भाजपा नेता के खिलाफ आपराधिक मामले को खारिज करने से इनकार करते हुए उन्हें कठोर कार्रवाई से बचाने के लिए कई निर्देश पारित किए थे। हालांकि जांच प्राधिकरण ने जांच के दौरान कहा था कि याचिकाकर्ता के खिलाफ गिरफ्तारी सहित किसी तरह की कठोर कार्रवाई नहीं करेगा, जब तक कि याचिकाकर्ता जांच एजेंसी के साथ सहयोग करेगा। इसने कहा था कि अगर जांच के किसी भी स्तर पर जांच एजेंसी को लगता है कि आरोपी सहयोग नहीं कर रहा है तो वह उसे कारण बताओ नोटिस जारी कर सकती है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि सौमेंदु से पूछताछ ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से भी की जाएगी। हाईकोर्ट ने प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार करते हुए कहा था कि वह मामले के गुण और तथ्यों पर विचार नहीं करेगा, इसे निचली अदालत देखेगी।