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SC Updates: अवैध खनन मामले में ईडी के सामने पेश नहीं हुए पांच जिलाधिकारी, सुप्रीम कोर्ट ने की खिंचाई

Tue, 02 Apr 2024 03:06 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पीठ ने कहा कि 'यह मानसिकता इन अधिकारियों को मुश्किल परिस्थिति में डाल देगी। जब अदालत उन्हें ईडी के समन पर पेश होने का निर्देश दे रही है, तो उन्हें आदेश का पालन करना चाहिए और ईडी के सामने पेश होना चाहिए।'
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के पांच जिलाधिकारियों को फटकार लगाई है। दरअसल पांचों जिलाधिकारी अवैध खनन मामले में ईडी के सामने पेश नहीं हुए थे। सुप्रीम कोर्ट ने पांचों अधिकारियों को 25 अप्रैल को ईडी के सामने पेश होने का आदेश दिया है। जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस पंकज मित्तल की सदस्यता वाली पीठ ने यह आदेश दिया। 
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पीठ ने अधिकारियों को लगाई फटकार
पीठ ने अधिकारियों के प्रति नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि अधिकारियों के मन में अदालत, कानून और संविधान के लिए कोई सम्मान नहीं है। पीठ ने कहा कि यह मानसिकता इन अधिकारियों को मुश्किल परिस्थिति में डाल देगी। जब अदालत उन्हें ईडी के समन पर पेश होने का निर्देश दे रही है, तो उन्हें आदेश का पालन करना चाहिए और ईडी के सामने पेश होना चाहिए। तमिलनाडु सरकार की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अमित आनंद त्रिवेदी सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में पेश हुए। 

सुप्रीम कोर्ट ने 27 फरवरी को अधिकारियों को ईडी के सामने पेश होने का दिया था निर्देश
तमिलनाडु सरकार के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि अधिकारी व्यवस्था बनाए रखने और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को लागू करने में व्यस्त थे। इस पर कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों को ईडी के सामने पेश होकर उन्हें पेश न होने की वजह बतानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों को ईडी के सामने पेश होने का आखिरी मौका दिया जा रहा है। दरअसल ईडी ने वेल्लोर, तिरुचिरापल्ली, करूर, तंजावुर, अरियालुर जिलों के जिलाधिकारियों को पूछताछ के लिए पेश होने को लिए कहा था। बीते साल 28 नवंबर को मद्रास हाईकोर्ट ने ईडी के समन पर रोक लगा दी थी। जिस पर ईडी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। बीती 27 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए पांचों जिलाधिकारियों को अवैध खनन से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी के सामने पेश होने का निर्देश दिया था। 
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सुप्रीम कोर्ट ने मुख्तार अंसारी के मामले में सुनवाई रोकी

सुप्रीम कोर्ट ने मुख्तार अंसारी की मौत पर संज्ञान लेते हुए मंगलवार को उस मामले पर सुनवाई बंद कर दी, जिसमें उन्होंने 24 साल पुराने एक मामले में सजा को चुनौती दी थी। गौरतलब है कि उन्हें इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पिछले साल ही पांच साल कारावास की सजा सुनाई थी। इस फैसले को ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

गैंगस्टर से नेता बने मुख्तार अंसारी ने जेल में रहते हुए सजा के खिलाफ अपील दाखिल की थी। जस्टिस बेला त्रिवेदी और जस्टिस पंकज मिथल की बेंच ने अंसारी के निधन संबंधी बयान पर संज्ञान लेते हुए कहा, ‘‘याचिकाकर्ता अब जीवित नहीं है। इसलिए सुनवाई की प्रक्रिया समाप्त की जाती है।’’

अंसारी की 28 मार्च को उत्तर प्रदेश के बांदा जेल के अस्पताल में हृदयाघात से मौत हो गई थी। पिछले साल 13 अक्टूबर को शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ अंसारी द्वारा दाखिल अपील पर उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया था।

उत्तर प्रदेश गिरोहबंद और समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम के तहत 1999 में लखनऊ के हजरतगंज पुलिस थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। विशेष अदालत ने 2020 में अंसारी को बरी कर दिया था और राज्य सरकार ने इस फैसले के खिलाफ 2021 में हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। इससे पहले 23 सितंबर को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने गैंगस्टर अधिनियम के तहत मामले में अंसारी को अधीनस्थ अदालत द्वारा बरी करने के आदेश को पलटते हुए पांच साल कारावास की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने सांसद-विधायक विशेष अदालत द्वारा 2020 में बरी किए जाने के फैसले को पलटते हुए अंसारी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था।
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