सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा- सभी के लिए सुरक्षित फुटपाथ हेतु राष्ट्रीय दिशानिर्देश बनाएं
सुप्रीम कोर्ट ने सड़क सुरक्षा और पैदल यात्रियों के अधिकारों को लेकर लंबित जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को चार सप्ताह के भीतर एक समान और बाध्यकारी राष्ट्रीय दिशानिर्देश तैयार करने का आदेश दिया है। यह याचिका ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. एस. राजशेखरन ने दाखिल की थी। कोर्ट ने पाया कि देशभर में फुटपाथों की स्थिति दयनीय है। कहीं फुटपाथ हैं ही नहीं, कहीं अवैध अतिक्रमण हैं, और कहीं विकलांगजनों के लिए पहुंचना असंभव है। इससे न सिर्फ आम नागरिकों, बल्कि दिव्यांगों के जीवन और स्वतंत्र आवाजाही के अधिकारों (अनुच्छेद 14 और 21) का उल्लंघन होता है। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने केंद्र से तीन महत्वपूर्ण पहलुओं पर दिशानिर्देश मांगे हैं।
- नए और पुराने सड़कों में अनिवार्य फुटपाथ निर्माण हेतु तकनीकी मानक
- दिव्यांगों के लिए सार्वभौमिक रूप से सुलभ डिजाइन
- अतिक्रमण हटाने और रोकने के लिए प्रभावी तंत्र
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि तय समय में केंद्र दिशानिर्देश नहीं लाता, तो कोर्ट स्वयं हस्तक्षेप करेगा। अगली सुनवाई एक सितंबर 2025 को होगी।
महिला सेना अधिकारियों की याचिका- स्थायी कमीशन की मांग
सुप्रीम कोर्ट में महिला सेना अधिकारियों की याचिकाओं पर सुनवाई जारी है। ये अधिकारी शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) के तहत कार्यरत हैं और उन्होंने सेना में स्थायी कमीशन देने की मांग की है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उन्हें पुरुष अधिकारियों के समान अवसर मिलने चाहिए। कोर्ट ने पहले भी इस मुद्दे पर महिलाओं के पक्ष में अहम फैसले दिए हैं, लेकिन अभी भी कुछ अधिकारियों को स्थायी कमीशन नहीं मिला है।
लखीमपुर खीरी हिंसा मामला- सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है। इस घटना में किसानों की मौत हुई थी, और आरोप केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा पर लगे थे। अब कोर्ट यह देख रहा है कि क्या मामले की निष्पक्ष जांच हो रही है या नहीं। पीड़ित परिवारों ने न्याय की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।