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Supreme Court: 'चार साल में पूरा हो घाटे की भरपाई', बिजली दरों पर विद्युत नियामक आयोगों को 'सुप्रीम' निर्देश

Thu, 07 Aug 2025 11:05 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई
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सुप्रीम कोर्ट आज कई अहम मुकदमों पर सुनवाई करेगा। इन मामलों में महिला सैन्य अधिकारियों को परमानेंट कमीशन दिए जाने का मुद्दा सर्वाधिक चर्चित है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा से जुड़े मुकदमे पर भी सुनवाई होनी है। कांग्रेस से संबंधित आयकर विवाद का मामला भी शीर्ष अदालत की पीठ में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। इन मुकदमों के अलावा सुप्रीम कोर्ट की पीठ धन-शोधन निवारण कानून (पीएमएलए) के कई प्रावधानों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर भी सुनवाई करेगी। जानिए और किन अहम मुकदमों पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट...
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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा- सभी के लिए सुरक्षित फुटपाथ हेतु राष्ट्रीय दिशानिर्देश बनाएं
सुप्रीम कोर्ट ने सड़क सुरक्षा और पैदल यात्रियों के अधिकारों को लेकर लंबित जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को चार सप्ताह के भीतर एक समान और बाध्यकारी राष्ट्रीय दिशानिर्देश तैयार करने का आदेश दिया है। यह याचिका ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. एस. राजशेखरन ने दाखिल की थी। कोर्ट ने पाया कि देशभर में फुटपाथों की स्थिति दयनीय है। कहीं फुटपाथ हैं ही नहीं, कहीं अवैध अतिक्रमण हैं, और कहीं विकलांगजनों के लिए पहुंचना असंभव है। इससे न सिर्फ आम नागरिकों, बल्कि दिव्यांगों के जीवन और स्वतंत्र आवाजाही के अधिकारों (अनुच्छेद 14 और 21) का उल्लंघन होता है। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने केंद्र से तीन महत्वपूर्ण पहलुओं पर दिशानिर्देश मांगे हैं।
  • नए और पुराने सड़कों में अनिवार्य फुटपाथ निर्माण हेतु तकनीकी मानक
  • दिव्यांगों के लिए सार्वभौमिक रूप से सुलभ डिजाइन
  • अतिक्रमण हटाने और रोकने के लिए प्रभावी तंत्र

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि तय समय में केंद्र दिशानिर्देश नहीं लाता, तो कोर्ट स्वयं हस्तक्षेप करेगा। अगली सुनवाई एक सितंबर 2025 को होगी।

महिला सेना अधिकारियों की याचिका- स्थायी कमीशन की मांग
सुप्रीम कोर्ट में महिला सेना अधिकारियों की याचिकाओं पर सुनवाई जारी है। ये अधिकारी शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) के तहत कार्यरत हैं और उन्होंने सेना में स्थायी कमीशन देने की मांग की है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उन्हें पुरुष अधिकारियों के समान अवसर मिलने चाहिए। कोर्ट ने पहले भी इस मुद्दे पर महिलाओं के पक्ष में अहम फैसले दिए हैं, लेकिन अभी भी कुछ अधिकारियों को स्थायी कमीशन नहीं मिला है।

लखीमपुर खीरी हिंसा मामला- सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है। इस घटना में किसानों की मौत हुई थी, और आरोप केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा पर लगे थे। अब कोर्ट यह देख रहा है कि क्या मामले की निष्पक्ष जांच हो रही है या नहीं। पीड़ित परिवारों ने न्याय की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
 

कांग्रेस का आयकर विवाद- कोर्ट में मामला लंबित
कांग्रेस पार्टी से जुड़ा आयकर विभाग का एक पुराना मामला कोर्ट में है। इसमें पार्टी पर गलत तरीके से फंडिंग दिखाने और टैक्स बचाने का आरोप है। कांग्रेस ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है। कोर्ट में अभी इस पर फैसला नहीं हुआ है, लेकिन पार्टी ने राहत की मांग की है।

महत्वपूर्ण पक्षी 'ग्रेट इंडियन बस्टर्ड' को बचाने की याचिका
एक जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई है जिसमें 'ग्रेट इंडियन बस्टर्ड' जैसे संकटग्रस्त पक्षियों को बचाने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि बिजली की तारों और पवन चक्कियों के कारण इन पक्षियों की मौत हो रही है। कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है कि वह इस प्रजाति को बचाने के लिए क्या कर रही है।

दवाओं की कीमत पर निगरानी की याचिका 
ऑल इंडिया ड्रग एक्शन नेटवर्क ने एक जनहित याचिका के जरिए सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि सरकार दवाओं की कीमतें नियंत्रित करे। उनका कहना है कि कई जरूरी दवाएं बहुत महंगी हैं और आम आदमी की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं। कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है कि वह दवा कंपनियों पर कैसे नजर रख रही है।

बिजली दरों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: 4 साल में पूरा हो घाटे की भरपाई
सुप्रीम कोर्ट ने 6 अगस्त को एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि बिजली की दरें लागत आधारित होनी चाहिए, यानी जितनी लागत बिजली कंपनियों को आती है, उतनी वसूली दरों के ज़रिए की जानी चाहिए। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि राज्य बिजली नियामक आयोग (एसईआरसी) की तरफ से बनाए गए रेगुलेटरी एसेट्स यानी घाटे की रकम को 3 साल के भीतर वसूल लिया जाए। पुराने मामलों में अधिकतम 4 साल की सीमा दी गई है।

रेगुलेटरी एसेट्स वह राशि होती है जो बिजली कंपनियां खर्च कर चुकी होती हैं, लेकिन उपभोक्ताओं से तुरंत वसूली नहीं की जाती ताकि अचानक दरें न बढ़ें। इस रकम की वसूली बाद में की जाती है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य आयोगों को आदेश दिया है कि वे एक ठोस योजना बनाकर बताएं कि यह वसूली किस समय-सीमा में और कैसे की जाएगी। साथ ही, इस देरी से हुए ब्याज यानी कैरिंग कॉस्ट की भी गणना करके उसे शामिल किया जाए। यह फैसला उपभोक्ताओं की सुरक्षा और डिस्कॉम की आर्थिक सेहत, दोनों को संतुलित करने की कोशिश है।
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सुप्रीम कोर्ट ने बीपीएसएल परिसमापन मामले की दोबारा सुनवाई शुरू की
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बीपीएसएल के परिसमापन मामले में दोबारा सुनवाई शुरू की। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की विशेष पीठ ने 31 जुलाई को फैसले को वापस ले लिया और मामले में याचिकाओं पर नए सिरे से सुनवाई करने का फैसला किया। पूर्व न्यायाधीश बेला एम त्रिवेदी की अध्यक्षता वाली पीठ ने भूषण पावर एंड स्टील लिमिटेड (बीपीएसएल) के परिसमापन का आदेश दिया, जबकि बीमार कंपनी के लिए जेएसडब्ल्यू स्टील लिमिटेड की समाधान योजना को खारिज कर दिया था। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि बीपीएसएल के पूर्व प्रमोटरों का इस मामले में कोई अधिकार नहीं बनता, क्योंकि उन्होंने ही कंपनी को बर्बाद कर दिया। हम अपने और एनसीएलटी द्वारा स्वीकृत अपनी समाधान योजना का समर्थन कर रहे हैं। हालांकि यह पूर्व प्रवर्तकों द्वारा कुछ शर्तों को पूरा करने पर निर्भर है। बीपीएसएल के लिए दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) जुलाई 2017 में राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) द्वारा शुरू की गई थी और अक्टूबर 2018 में सीओसी ने जेएसडब्ल्यू स्टील द्वारा प्रस्तुत 19,000 करोड़ रुपये की समाधान योजना को मंजूरी दी थी।
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