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SC Updates: चुनावी बॉन्ड स्कीम की SIT जांच की मांग वाली याचिका पर होगी सुनवाई; बिलकिस केस की यह अर्जी खारिज

Fri, 19 Jul 2024 12:08 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड जारी करने वाले बैंक एसबीआई के चुनावी बॉन्ड जारी करने पर तुरंत रोक लगा दी थी। चुनावी बॉन्ड योजना के तहत राजनीतिक दलों को गुमनाम तरीके से चंदा देने का प्रावधान था। 
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Supreme Court - फोटो : PTI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट 22 जुलाई को उन याचिकाओं पर सुनवाई करेगा, जिनमें इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए राजनीतिक पार्टियों को उद्योग जगत से मिले चंदे की एसआईटी जांच कराने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस साल फरवरी में अपने एक फैसले में चुनावी बॉन्ड योजना को रद्द कर दिया था। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड जारी करने वाले बैंक एसबीआई के चुनावी बॉन्ड जारी करने पर तुरंत रोक लगा दी थी। चुनावी बॉन्ड योजना के तहत राजनीतिक दलों को गुमनाम तरीके से चंदा देने का प्रावधान था। 
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याचिकाएं सुनवाई के लिए सोमवार को हैं सूचीबद्ध
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि चुनावी बांड योजना की अदालत की निगरानी में जांच की मांग करने वाली जनहित याचिका पर 22 जुलाई को सुनवाई होगी। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने वकील प्रशांत भूषण की दलीलों पर गौर किया और कहा कि दो गैर सरकारी संगठनों - कॉमन कॉज और सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (सीपीआईएल) की जनहित याचिका सोमवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं।

दो गैर सरकारी संगठनों की याचिका में चुनावी बॉन्ड योजना को 'घोटाला' करार दिया गया है। याचिकाओं में उन 'शेल कंपनियों और घाटे में चल रही कंपनियों' के वित्तपोषण के स्रोत की जांच करने की भी मांग की गई है, जिन्होंने विभिन्न राजनीतिक दलों को दान दिया है। पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 15 फरवरी को भाजपा सरकार द्वारा शुरू की गई चुनावी बॉन्ड योजना को रद्द कर दिया था। शीर्ष अदालत के फैसले के बाद, इस योजना के तहत अधिकृत वित्तीय संस्थान भारतीय स्टेट बैंक ने डेटा को चुनाव आयोग के साथ साझा किया था, जिसने बाद में इसे सार्वजनिक कर दिया था। 2 जनवरी, 2018 को सरकार द्वारा अधिसूचित चुनावी बॉन्ड योजना को राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता लाने के लिए राजनीतिक दलों को दिए जाने वाले नकद दान के विकल्प के रूप में पेश किया गया था।
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बिलकिस बानो मामले के दोषियों की याचिका पर सुनवाई से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने बिलकिस बानो मामले में दो दोषियों की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। दरअसल बिलकिस बानो मामले में दोषी पाए गए दो लोगों ने सुप्रीम कोर्ट के 8 जनवरी के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने 8 जनवरी को दिए अपने फैसले में बिलकिस बानो मामले के दोषियों की सजा में छूट के आदेश को रद्द कर दोषियों को आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था।  

याचिका में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उठाए गए सवाल
मार्च में दोनों दोषियों ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था और दलील दी थी कि उनकी सजा की माफी को रद्द करने वाला 8 जनवरी का फैसला 2002 के संविधान पीठ के आदेश के विपरीत है। उन्होंने इस मुद्दे को अंतिम निर्णय के लिए बड़ी पीठ को सौंपने की मांग की थी। जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने याचिका को 'बिल्कुल गलत' करार दिया और कहा कि वह शीर्ष अदालत की दूसरी पीठ द्वारा पारित आदेश पर दायर अपील पर कैसे सुनवाई कर सकती है। इसके बाद दोषियों के वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। गौरतलब है कि दोषियों राधेश्याम भगवानदास शाह और राजूभाई बाबूलाल सोनी की ओर से सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की गई थी। 

स्थायी न्यायाधीश बने दो उच्च न्यायालयों के 10 अतिरिक्त न्यायाधीश
दिल्ली उच्च न्यायालय के तीन न्यायाधीशों सहित 10 अतिरिक्त न्यायाधीशों को शुक्रवार को स्थायी न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया। कानून मंत्रालय ने यह जानकारी दी। 

कानून मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक, बंबई उच्च न्यायालय के सात अतिरिक्त न्यायाधीशों को न्यायाधीश बनाया गया है। इसी उच्च न्यायालय के दो अतिरिक्त न्यायाधीशों को सात अक्तूबर से एक साल के नए कार्यकाल के लिए अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। 
 
दिल्ली उच्च न्यायालय के तीन अतिरिक्त न्यायाधीशों न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया, न्यायमूर्ति मनोज जैन और न्यायमूर्ति धर्मेश शर्मा को स्थायी न्यायाधीश बनाया गया है। आमतौर पर न्यायाधीश बनने से पहले उन्हें अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में दो साल की अवधि के लिए नियुक्त किया जाता है। 
  
सर्वोच्च न्यायालय ने पुनर्विचार याचिका खारिज की
सर्वोच्च न्यायालय ने उस याचिका को खारिज किया है, जिसमें मौजूदा चुनाव प्रणाली में मतदाता की गोपनीयता के उल्लंघन का आरोप लगाने वाली जनहित याचिका खारिज करने के उसके फैसले पर पुनर्विचार की मांग की गई थी। न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीट ने कहा कि फैसले की समीक्षा का कोई मामला ही नहीं बनता है। पीठ ने पुनर्विचार याचिका पर खुली अदालत में सुनवाई के अनुरोध को भी खारिज किया। 

पीठ ने कहा, हमने पुनर्विचार याचिका और उसके समर्थन के आधार पर सावधानीपूर्वक गौर किया है। हमारी राय में 17 मई, 2024 के आदेश की समीक्षा का कोई मामला नहीं बनता है। इसलिए, पुनर्विचार याचिका खारिज की जाती है। शीर्ष अदालत चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रबंध निदेश एग्नोस्टोस थियोस की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। जिसमें 17 मई के शीर्ष अदालत के आदेश की समीक्षा का आग्रह किया गया था। 
 
याचिका पर सुनवाई के सहमत हुआ सर्वोच्च न्यायालय
उच्चतम न्यायालय पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई करने के लिए शु्क्रवार को सहमत हुआ। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में अधिकारियों को प्रदर्शनकारियों से चंडीगढ़-मोहाली मार्ग खाली करने के लिए कहा गया था। शीर्ष अदालत ने एक अन्य याचिका पर सुनवाई करते हुए इस साल मई में उच्च न्यायालय के नौ अप्रैल के आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी। 

समान सेवानिवृत्ति आयु मामले में राजस्थान की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट करेगा विचार
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एलोपैथिक और आयुष डॉक्टरों के लिए समान सेवानिवृत्ति आयु मामले में राजस्थान सरकार की याचिका पर विचार करने पर सहमति जता दी। याचिका में हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें कहा गया था कि एलोपैथिक डॉक्टरों और वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों का अभ्यास करने वालों के लिए सेवानिवृत्ति की आयु अलग-अलग नहीं हो सकती। एलोपैथिक डॉक्टरों की कमी को देखते हुए राजस्थान सरकार ने 31 मार्च 2016 से उनकी सेवानिवृत्ति की आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष कर दी थी। 
 
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