फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

SC: दिल्ली सरकार के दिशा-निर्देशों के खिलाफ याचिका दाखिल; SC ने कहा- NDPS मामले में अग्रिम जमानत गंभीर मुद्दा

Thu, 19 Sep 2024 12:41 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

झारखंड की हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली झामुमो सरकार ने न्यायमूर्ति एम एस रामचंद्र राव को झारखंड उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने के लिए कॉलेजियम द्वारा की गई सिफारिश को मंजूरी नहीं देने के लिए केंद्र के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया है। 
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

केंद्र सरकार ने उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट के साथ कुछ जानकारी साझा करने की बात कही है। केंद्र ने गुरुवार को कहा कि देश के कई उच्च न्यायालयों में मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति पर कॉलेजियम की सिफारिशों के बारे में अगले सप्ताह कुछ जानकारी उपलब्ध कराएंगे। दरअसल हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर कॉलेजियम ने सिफारिश की है, लेकिन कई नामों को अभी तक मंजूरी नहीं मिली है। जिस पर झारखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इस याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई होनी है, लेकिन अब केंद्र ने सुनवाई स्थगित करने की मांग की है और एक सप्ताह बाद याचिका पर सुनवाई करने की मांग की है। 
विज्ञापन


झारखंड की हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली झामुमो सरकार ने न्यायमूर्ति एम एस रामचंद्र राव को झारखंड उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने के लिए कॉलेजियम द्वारा की गई सिफारिश को मंजूरी नहीं देने के लिए केंद्र के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया है। इससे पहले, अटॉर्नी जनरल ने 13 सितंबर को पीठ को बताया था कि केंद्र सरकार को कुछ 'संवेदनशील सामग्री' मिली है, जिसके कारण उच्च न्यायालयों में मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति पर शीर्ष न्यायालय कॉलेजियम की सिफारिशों के कार्यान्वयन में देरी हुई है। सीजेआई की अध्यक्षता वाले तीन सदस्यीय कॉलेजियम ने 11 जुलाई को दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, केरल, मध्य प्रदेश, मद्रास और मेघालय जैसे सात उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए केंद्र को नामों की सिफारिश की थी। सिफारिशें केंद्र के पास मंजूरी के लिए लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 17 जुलाई को मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति से संबंधित अपने 11 जुलाई के प्रस्ताव में बदलाव किया। ऐसी अटकलें थीं कि कॉलेजियम के 11 जुलाई के प्रस्ताव में बदलाव जाहिर तौर पर केंद्र द्वारा कॉलेजियम के साथ कुछ महत्वपूर्ण जानकारी साझा करने के बाद हुआ।

 

सुप्रीम कोर्ट परिसर में आयोजित किया गया हेल्थ कैंप

सुप्रीम कोर्ट परिसर में गुरुवार को हेल्थ कैंप का आयोजन किया गया। इस कैंप का आयोजन सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और रोटरी क्लब ने मिलकर किया है। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने इस स्वास्थ्य कैंप का उद्घाटन किया। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कपिल सिब्बल भी मौजूद रहे। कैंप के उद्घाटन पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इससे वकीलों और क्लर्कों को फायदा होगा और वे अपने स्वास्थ्य को लेकर ज्यादा जागरुक बनेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने 2021 के फैसले के खिलाफ सीमा शुल्क विभाग की समीक्षा याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सीमा शुल्क विभाग की उस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें 2021 के अपने फैसले की समीक्षा की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 2021 के फैसले में कहा था कि राजस्व खुफिया निदेशालय के अधिकारियों को  जिसमें कहा गया था कि सीमा शुल्क विभाग द्वारा पहले ही मंजूर कर लिए गए सामान पर राजस्व खुफिया निदेशालय के अधिकारियों को शुल्क की वसूली की मांग करने का कोई अधिकार नहीं है।

चार दिनों तक चली सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेवी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने सीमा शुल्क विभाग की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एन वेंकटरमन और मामले में निजी कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी के नेतृत्व में वकीलों के एक समूह की दलीलें सुनीं। आमतौर पर, निर्णयों के खिलाफ समीक्षा याचिकाओं पर न्यायाधीशों द्वारा चैंबर में विचार किया जाता है और कोई मौखिक दलीलें स्वीकार नहीं की जाती हैं। हालांकि, सीमा शुल्क विभाग की समीक्षा याचिका पर खुली अदालत में सुनवाई हुई।

एएसजी वेंकटरमन ने 2021 के फैसले को खारिज करने की जोरदार मांग करते हुए कहा कि राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) के अधिकारियों को भी सीमा शुल्क अधिनियम के तहत आयात के लिए पहले से ही मंजूरी प्राप्त वस्तुओं पर शुल्क की वसूली की मांग करने का अधिकार है। कानूनी अधिकारी ने कहा, 'आज का डीआरआई अधिकारी कल सीमा शुल्क अधिकारी हो सकता है।'

पुराने वाहनों पर दिल्ली सरकार के दिशा-निर्देशों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल

निर्धारित अवधि पूरी कर चुके पुराने वाहनों को सार्वजनिक स्थानों पर ले जाने से संबंधित दिल्ली सरकार के नए दिशानिर्देशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। नागलक्ष्मी लक्ष्मी नारायण की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि कबाड़ घोषित हो चुके वाहनों को सार्वजनिक स्थानों पर रखने के संबंध में जारी दिशानिर्देश को पिछली तारीख से लागू करना एक मनमाना कदम है। यह संविधान के अनुच्छेद 300 ए के तहत आवेदक को प्राप्त संपत्ति के अधिकार से उसे वंचित करता है। याचिका में कहा गया है कि वाहनों की स्थिति और उनके की तरफ से किए जाने वाले उत्सर्जन को जांचे बगैर वाहनों को कबाड़ घोषित करने के नियम लागू किए गए हैं।

दिल्ली सरकार ने फरवरी में जीवनकाल पूरा कर चुके वाहनों को सार्वजनिक स्थानों पर ले जाने के नए दिशानिर्देश जारी किए थे। इसमें जब्त किए गए वाहनों को लेकर मालिकों पर जुर्माने का प्रावधान किया गया था। इनमें चारपहिया वाहनों के लिए 10,000 रुपये और दोपहिया वाहनों के लिए 5,000 रुपये का प्रावधान किया गया था। दिशानिर्देशों के अनुसार, दूसरी बार जब्त किए गए किसी भी पुराने वाहन और 10 वर्ष से अधिक पुराने डीजल-चालित परिवहन वाहनों को किसी भी स्थिति में नहीं छोड़ा जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट: ऑनलाइन मध्यस्थता प्रशिक्षण वेब-पोर्टल की शुरुआत

सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन मध्यस्थता प्रशिक्षण वेब-पोर्टल की शुरुआत की। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) ने शीर्ष अदालत की मध्यस्थता व सुलह परियोजना समिति (एमसीपीसी) के सहयोग से पोर्टल को विकसित किया है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस संजीव खन्ना, कार्यकारी अध्यक्ष नालसा ने बुधवार को पोर्टल लॉन्च किया। समारोह में बोलते हुए, चंद्रचूड़ ने कहा कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम मध्यस्थता की कला में वकीलों, न्यायाधीशों, कानून के छात्रों आदि को प्रशिक्षित करके मध्यस्थता को विवाद समाधान का पहला और डिफ़ॉल्ट तरीका बनाने में मदद करेगा।
विज्ञापन

एनडीपीएस कानून के तहत दर्ज मामले में अग्रिम जमानत देना बहुत गंभीर मुद्दा, ऐसा पहले कभी नहीं सुना: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) कानून के तहत दर्ज मामले में अग्रिम जमानत देना बहुत गंभीर मुद्दा है। यह ऐसा मामला है, जो पहले कभी नहीं सुना गया। कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को आरोपी को दी गई अग्रिम जमानत को रद्द करने के लिए आवेदन दायर करने पर विचार करने को कहा।

जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ पश्चिम बंगाल में एनडीपीएस कानून के प्रावधानों के तहत दर्ज एक मामले में नियमित जमानत की मांग करने वाली एक आरोपी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि एनडीपीएस मामले में अग्रिम जमानत? एनडीपीएस मामले में अग्रिम जमानत के बारे में कभी नहीं सुना गया है। पीठ ने कहा कि हम याचिका पर नोटिस जारी कर सकते हैं और राज्य को सहआरोपी को दी गई अग्रिम जमानत रद्द करने के लिए आवेदन दायर करने का निर्देश दे सकते हैं। पीठ ने कहा कि एनडीपीएस मामले में अग्रिम जमानत देना बहुत गंभीर मुद्दा है। इसलिए हम राज्य को यह विचार करने का निर्देश देते हैं कि क्या वह सहआरोपी को दी गई अग्रिम जमानत रद्द करने के लिए आवेदन दायर करने के बारे में सोच रहा है। पश्चिम बंगाल को नोटिस जारी कर पीठ ने सुनवाई चार हफ्ते के लिए स्थगित कर दी।

याचिकाकर्ता ने बताया, छह में से चार को गिरफ्तारी पूर्व जमानत, एक नियमित जमानत पर

याचिकाकर्ता के वकील ने पीठ को बताया कि मामले के छह आरोपियों में से चार को गिरफ्तारी पूर्व जमानत दी गई है, जबकि उनमें से एक नियमित जमानत पर है। याचिका में आरोपी ने कलकत्ता हाईकोर्ट के इस साल जुलाई के आदेश को चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने अक्तूबर 2023 में दर्ज मामले में नियमित जमानत के अनुरोध संबंधी याचिका खारिज कर दी थी।

हाईकोर्ट ने कहा था, नमूनों का परीक्षण सकारात्मक, हम जमानत नहीं दे सकते

कलकत्ता हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि एफएसएल को भेजे गए नमूनों का परीक्षण सकारात्मक आया है, जो दिखाता है कि याचिकाकर्ता से जब्त की गई सामग्री प्रतिबंधित है। ‘गांजा’ की व्यावसायिक मात्रा को देखते हुए और एनडीपीएस अधिनियम की धारा 37 में प्रतिबंधों को ध्यान में रखते हुए, हम इस स्तर पर याचिकाकर्ता को जमानत देने के लिए इच्छुक नहीं हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें