भारत के सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने गुरुवार को हाई कोर्ट के सात न्यायाधीशों का अलग-अलग अदालतों में ट्रांसफर करने की सिफारिश की है। जानकारी के मुताबिक, कॉलेजियम के प्रस्ताव शीर्ष कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड कर दिये गये हैं। कॉलेजियम के सदस्यों में न्यायमूर्ति एस.के. कौल और न्यायमूर्ति एस ए नजीर भी शामिल हैं।
जिन सात न्यायाधीशों का स्थानांतरण करने की सिफारिश की गई है, उनमें मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश वी एम वेलुमणि शामिल हैं। वह कलकत्ता उच्च न्यायालय में भेजे जाएंगे। न्यायमूर्ति बी देवानंद को आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय से मद्रास उच्च न्यायालय, न्यायमूर्ति डी रमेश को आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय से इलाहाबाद उच्च न्यायालय, न्यायमूर्ति ललित कन्नेगांति को तेलंगना उच्च न्यायालय से कर्नाटक उच्च न्यायालय स्थानांतरित करने की सिफारिश की गई है। साथ ही न्यायमूर्ति डी नागार्जुन को तेलंगाना उच्च न्यायालय से मद्रास उच्च न्यायालय, न्यायमूर्ति टी राजा को मद्रास उच्च न्यायालय से राजस्थान उच्च न्यायालय, न्यायमूर्ति ए अभिषेक रेड्डी को तेलंगाना उच्च न्यायालय से पटना उच्च न्यायालय स्थानांतरित करने की सिफारिश की गई है। न्यायमूर्ति रेड्डी का स्थानांतरण किये जाने के विरोध में तेलंगाना उच्च न्यायालय के वकीलों ने प्रदर्शन किया था।
तमिलनाडु में पोंगल के समय आयोजित होने वाले जल्लीकट्टू को लेकर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान कुछ याचिकाकर्ताओं ने दलील देते हुए कहा कि जल्लीकट्टू में पशुओं और मनुष्यों को चोट लगती है और यहां तक कि मृत्यु भी हो जाती है। ऐसे में क्रूरता वाली ऐसी चीज को अनुमति नहीं दी जा सकती। इन याचिकाकर्ताओं ने कहा ऐसा कोई प्रावधान नहीं हो सकता जो पशु क्रूरता रोकथाम अधिनियम जैसे किसी कानून के उद्देश्य के खिलाफ हो।
गौरतलब है कि जल्लीकट्टू या इरुथाझुवुथाल तमिलनाडु में पोंगल के समय आयोजित होता है जिसमें बेकाबू साड़ों को काबू में करने का प्रयास किया जाता है।