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Supreme Court: चार मुद्दों पर सुनवाई के लिए अगले सप्ताह से विशेष पीठ; आरे कॉलोनी मामले की सुनवाई कल

Wed, 23 Nov 2022 08:23 PM IST
शक्तिराज सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट मुंबई की आरे कॉलोनी में काटे गए पेड़ों के मामले में गुरुवार को सुनवाई करेगा। 
 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट में अगले सप्ताह से चार मुद्दों पर सुनवाई के लिए चार विशेष बेंच होंगी। भारत के प्रधान न्यायाधीश धनंजय डीवाई चंद्रचूड़ ने इसकी घोषणा की। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में चार मुद्दों पर सुनवाई करने के लिए चार विशेष बेंच होंगी। इनमें आपराधिक मामले, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर, भूमि अधिग्रहण और मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण से जुड़े मामले शामिल हैं।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
मुंबई: पेड़ काटे जाने के मामले की सुनवाई 24 नवंबर को 
सुप्रीम कोर्ट मुंबई की आरे कॉलोनी में काटे गए पेड़ों के मामले में गुरुवार को सुनवाई करेगा। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति हिमा कोहली और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एमएमआरसीएल) की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलों पर ध्यान दिया। मेहता ने दलील दी थी कि 84 पेड़ों को काटा जाना जरूरी था।

अखिल भारतीय फुटबाल महासंघ
AIFF से जुड़ी याचिका पर छह दिसंबर को सुनवाई 
सुप्रीम कोर्ट अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) से जुड़ी एक याचिका पर छह दिसंबर को सुनवाई करेगा। कोर्ट ने कहा कि वह AIFF की याचिका और मसौदा संविधान से संबंधित आपत्तियों पर  सुनवाई करेगा। इससे पहले पीठ ने कहा था कि फुटबॉल को आगे बढ़ाने की जरूरत है। 

(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया
न्यायाधीशों की नियुक्ति पर सिफारिशों को अधिसूचित करने का मामला
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उस याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमति जताई, जिसमें कॉलेजियम द्वारा भेजे गए न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए सभी सिफारिशों को तुरंत अधिसूचित करने के लिए केंद्र को निर्देश देने की मांग की गई है। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस हिमा कोहली और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने कहा कि वह अधिवक्ता प्रशांत भूषण द्वारा मामले का उल्लेख करने के बाद मामले को सूचीबद्ध करेगी।

अवैध धर्मांतरण को रोकने के लिए IPC और CrPC में संशोधन की मांग  

वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में एक नया आवेदन दाखिल किया है। इसमें उन्होंने लालच, आर्थिक लाभ, धोखे या डरा-धमकाकर कराए जाने वाले धर्मांतरण को रोकने के लिए भारतीय दंड संहिता और आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) में संशोधन करने का निर्देश देने की मांग की गई है। 

उन्होंने एक लंबित याचिका के संबंध में नया आवेदन दाखिल किया है। उन्होंने धार्मिक उपदेशकों और विदेशी मिशनरियों के लिए वीज़ा नियमों और विदेशी चंदे वाले एनजीओ और व्यक्तियों के लिए विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) नियमों की समीक्षा करने के लिए केंद्र को निर्देश देने की भी मांग की है।

जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जताई सहमति

एनजीओ सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन द्वारा दायर उस जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को सहमति जताई है, जिसमें केंद्र को उच्च न्यायपालिका में उन उम्मीदवारों की नियुक्ति को अधिसूचित करने का निर्देश देने की मांग की गई थी, जिनके नाम कॉलेजियम द्वारा दोहराए गए हैं। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हिमा कोहली और जेबी पर्दीवाला की पीठ को एनजीओ की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने बताया कि याचिका 2018 में दायर की गई थी लेकिन सूचीबद्ध नहीं की गई थी। इस पर पीठ ने कहा कि इसे सूचीबद्ध किया जाएगा। इसके लिए प्रशासनिक आदेश पारित होगा। 

एनजीओ ने आरोप लगाया कि उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए शीर्ष अदालत के कॉलेजियम द्वारा सुझाए गए नामों पर केंद्र अनिश्चित काल तक बैठा रहा।
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धर्मांतरण रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट से कानून में संशोधन कराने की मांग

डरा-धमकाकर, धोखे से या पैसे का लालच देकर धर्मांतरण पर रोक लगाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक नई अर्जी दी गई है। इसमें सरकार को आईपीसी और सीआरपीसी में संशोधन करने का निर्देश देने का आग्रह किया गया है।

वकील अश्विनी उपाध्याय ने अपने आवेदन में कहा है कि वह धर्मांतरण के मुद्दे पर केंद्रीय गृह और कानून व न्याया मंत्रालय को 31 अगस्त, 2022 को ही विस्तृत जानकारी दे चुके हैं। उन्होंने अदालत से केंद्र को धार्मिक उपदेशकों और विदेशी मिशनरियों के लिए वीजा नियमों की समीक्षा करने का निर्देश भी देने का आग्रह किया है। एनजीओ और लोगों को विदेश से मिलने वाले चंदे से संबंधित कानून विदेश अंशदान विनियमन अधिनियम (फेरा) की समीक्षा करने का निर्देश देने को भी कहा है।  
 
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