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Supreme Court: CrPC की धारा 64 मामले में शीर्ष अदालत का केंद्र को नोटिस, पढ़ें कोर्ट की अहम खबरें

Mon, 21 Nov 2022 09:31 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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याचिका में दोनों अध्यादेशों को रद्द करने का अनुरोध किया गया है। - फोटो : सोशल मीडिया
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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने यह नोटिस CrPC की धारा 64 को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर भेजा है। याचिका में कहा गया है कि धारा 64 महिलाओं के साथ भेदभाव करती है। इसके मुताबिक, किसी व्यक्ति को जारी समन परिवार की महिला उसकी जगह पर स्वीकार करने के योग्य नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कानून व न्याय मंत्रालय और केंद्रीय गृह मंत्रालय से इस संबंध में जवाब मांगा है।

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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : amar ujala
पीडीएस घोटाले से जुड़ी याचिका को सुनगी नई पीठ
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि CJI डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ प्रवर्तन निदेशालय की याचिका पर सुनवाई करेगी, जिसमें 'नागरिक आपूर्ति निगम' या पीडीएस घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले को छत्तीसगढ़ के बाहर स्थानांतरित करने की मांग की गई थी।

CJI ने बताई यह वजह
प्रधान न्यायाधीश और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ को छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने बताया कि ईडी की याचिका को न्यायमूर्ति एमआर शाह की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष आज फिर से सूचीबद्ध किया गया है। 

CJI ने उन परिस्थितियों के बारे में बताया जिसके तहत मामला सोमवार को फिर से उसी बेंच के सामने सूचीबद्ध हुआ। सीजेआई ने कहा कि तीन जजों की बेंच में उनके साथ जस्टिस अजय रस्तोगी और एस रवींद्र भट शामिल हैं। वे ही इसकी सुनवाई करेंगे। 

छत्तीसगढ़ सरकार की दलील
छत्तीसगढ़ सरकार ने हाल ही में न्यायमूर्ति शाह की अध्यक्षता वाली पीठ को इस मामले में आगे नहीं बढ़ने के लिए कहा था, क्योंकि इसे तीन-न्यायाधीशों की पीठ द्वारा सुना जाना आवश्यक था। तब सिब्बल द्वारा सीजेआई की खंडपीठ के समक्ष इसका उल्लेख किया गया।
 
क्या है मामला?
कथित घोटाला फरवरी 2015 में सामने आया था, जब रमन सिंह के नेतृत्व में भाजपा सरकार सत्ता में थी। एसीबी ने नागरिक आपूर्ति निगम (एनएएन) के कार्यालयों पर छापा मारा, जिस एजेंसी को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के प्रभावी कामकाज का काम सौंपा गया था। इस दौरान 3.64 करोड़ रुपये की बेहिसाब नकदी जब्त की थी। प्राथमिकी में चावल और अन्य खाद्यान्न की खरीद और परिवहन में बड़े पैमाने पर भ्रष्ट आचरण का आरोप लगाया गया था, जिसमें राज्य नागरिक आपूर्ति निगम, रायपुर से संबंधित अधिकारी और अन्य शामिल थे।

सुकेश चंद्रशेखर मामले में केंद्र-दिल्ली सरकार को नोटिस

सुकेश चंद्रशेखर - फोटो : PTI
सुप्रीम कोर्ट ने ठग सुकेश चंद्रशेखर को मंडोली कारागार से देश के किसी अन्य कारागार में स्थानांतरित करने की याचिका पर केंद्र और दिल्ली सरकार से जवाब है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 23 अगस्त को ठग सुकेश चंद्रशेखर व उसकी पत्नी लीना पॉलोज को दिल्ली की तिहाड़ जेल से दिल्ली की मंडोली जेल में शिफ्ट करने का आदेश दिया था। ठग ने तिहाड़ में अपनी जान को खतरा बताया था।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पंजाब में अवैध शराब के कारोबार के कुछ मामलों की जांच में हुई प्रगति पर असंतोष व्यक्त किया और कहा कि राज्य इस मुद्दे को कमजोर नजरिए से देख रहा है।गरीब और दलित लोगों के जहरीली त्रासदियों के पीड़ित होने के मद्देनजर  शीर्ष अदालत ने पंजाब आबकारी विभाग को निर्देश दिया कि वह इस संबंध में दर्ज की गई कुछ प्राथमिकी से संबंधित विवरणों से अवगत कराए।

न्यायमूर्ति एम आर शाह और न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश की पीठ ने कहा कि ऐसा लगता है कि असली दोषियों तक पहुंचने के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं किए गए हैं जो अवैध शराब के निर्माण और परिवहन के कारोबार में हैं। पीठ ने टिप्पणी की, आप इसे आसान मुद्दा समझकर के साथ व्यवहार कर रहे हैं। शीर्ष अदालत पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के सितंबर 2020 के एक आदेश से उत्पन्न एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें नकली शराब के आसवन, इसकी बिक्री और अंतर-राज्यीय तस्करी के संबंध में पंजाब में दर्ज कुछ एफआईआर को स्थानांतरित करने की मांग वाली याचिका का निस्तारण किया गया।  

 
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फर्जी फार्मासिस्टों और डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने पर बिहार सरकार को फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राज्य में फर्जी फार्मासिस्टों और डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने के लिए बिहार सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि अदालत उसे लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं दे सकती है। जस्टिस एमआर शाह और एमएम सुंदरेश की पीठ ने फार्मासिस्ट मुकेश कुमार द्वारा राज्य में प्रैक्टिस करने वाले फर्जी फार्मासिस्टों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने वाले पटना हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर अपील पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। हाई कोर्ट ने 9 दिसंबर, 2019 को कुमार से फर्जी चिकित्सकों के नाम देने को कहा था ताकि उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

बेंच ने कहा, यह एक गंभीर मुद्दा है। यह सुनिश्चित करना बिहार सरकार का कर्तव्य है कि राज्य में फर्जी फार्मासिस्टों द्वारा एक भी अस्पताल या फार्मेसी नहीं चलाई जाए। हम राज्य सरकार को लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ नहीं करने दे सकते। अगर कोई अप्रशिक्षित व्यक्ति गलत दवा देता है या गलत खुराक देता है, तो यह लोगों के लिए खतरनाक साबित होगा। इसके लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाएगा? बिहार जैसे राज्यों में समस्या फर्जी फार्मासिस्टों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि फर्जी डॉक्टरों की भी है। कुमार की ओर से पेश अधिवक्ता रचिता राय ने कहा कि फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा गठित तथ्यान्वेषी समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बड़ी संख्या में फर्जी डिग्रियां दी गईं।
 
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