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SC Updates: सौम्या विश्वनाथन मर्डर केस में दोषियों की जमानत के खिलाफ सुनवाई, दिल्ली सरकार को नोटिस जारी

Mon, 22 Apr 2024 01:08 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिल्ली की साकेत कोर्ट द्वारा 30 सितंबर 2008 को सौम्या विश्वनाथन हत्याकांड से जुड़े चार दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, इस साल फरवरी में दिल्ली उच्च न्यायालय ने उन्हें जमानत दे दी थी.
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार सौम्या विश्वनाथन हत्याकांड से जुड़े मामले में सोमवार को सुनवाई की। सौम्या की मां की तरफ से दोषियों की जमानत के खिलाफ दायर याचिका पर कोर्ट ने दिल्ली सरकार और चारों दोषियों को नोटिस जारी किया है। गौरतलब है कि दिल्ली की साकेत कोर्ट ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने उन्हें मामले में जमानत दे दी थी। इसी को लेकर सौम्या की मां ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। 

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दिल्ली की साकेत कोर्ट द्वारा 30 सितंबर 2008 को सौम्या विश्वनाथन हत्याकांड से जुड़े चार दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। कोर्ट ने रवि कपूर, अमित शुक्ला, बलजीत सिंह मलिक और अजय कुमार को दोहरे आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए हर एक दोषी पर 1.25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था।

हालांकि, इस साल फरवरी में दिल्ली उच्च न्यायालय ने चारों दोषियों की सजा को निलंबित कर दिया। इसके साथ ही चारों दोषियों की सजा को चुनौती देने वाली अपीलों का निपटारा होने तक उन्हें जमानत दे दी गई। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा था कि चारों दोषी 14 साल से हिरासत में हैं। इस दौरान उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस से चारों दोषियों द्वारा दायर अपीलों पर जवाब देने को कहा था। 

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कर्नाटक में सूखा मुद्दे के समाधान के लिए चुनाव आयोग ने दी मंजूरी : केंद्र

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि चुनाव आयोग ने उसे सूखा प्रबंधन के लिए वित्तीय सहायता के संबंध में कर्नाटक की ओर से उठाए गए मुद्दों का समाधान करने की मंजूरी दे दी है। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ सूखा प्रबंधन के लिए राज्य को राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष (एनडीआरएफ) से वित्तीय सहायता जारी करने का निर्देश देने संबंधी कर्नाटक सरकार की याचिका पर सुनवाई कर रही है।

अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कहा कि चुनाव आयोग ने सरकार को इस मुद्दे का समाधान करने की स्वीकृति दे दी है। मुझे लगता है कि इसे तेजी से किया जाना चाहिए। उन्होंने पीठ से कहा कि इस मामले पर अगले सप्ताह सुनवाई हो सकती है। इस पर मामले को स्थगित करते हुए पीठ ने कहा कि यह सब सौहार्दपूर्ण तरीके से किया जाना चाहिए। हमारे पास एक संघीय ढांचा है। केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अटाॅर्नी जनरल वेंकटरमणी ने पीठ से कहा कि वे इस विषय पर निर्देश लेंगे। याचिका में यह घोषित करने का भी अनुरोध किया गया है कि एनडीआरएफ के अनुरूप सूखा प्रबंधन के लिए वित्तीय सहायता नहीं जारी करना संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत राज्य के लोगों को प्रदत्त मूल अधिकारों का हनन है। 

तमिलनाडु की आपत्ति पर केरल से जवाब मांगा

तमिलनाडु सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में भारतीय सर्वेक्षण विभाग के इस निष्कर्ष का विरोध किया कि केरल ने मुल्लापेरियार बांध के पास एक मेगा कार पार्किंग परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान अक्तूबर 1886 के पेरियार झील पट्टा समझौते के तहत आने वाली भूमि पर अतिक्रमण नहीं किया है। जस्टिस अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने केरल के खिलाफ तमिलनाडु द्वारा दायर मूल मुकदमे में सुनवाई के लिए कानूनी मुद्दों को अंतिम रूप देने के लिए 10 जुलाई की तारीख तय की।

'वकील के रूप में नामांकन के लिए 600 रुपये से अधिक शुल्क नहीं लिया जा सकता'

उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि देशभर में विधि स्नातकों को वकील के रूप में नामांकित करने के लिए 600 रुपये से अधिक शुल्क नहीं लिया जा सकता। शीर्ष अदालत ने राज्य बार निकायों द्वारा लिए जा रहे ज्यादा शुल्क को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने 10 याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखते हुए अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 24 का उल्लेख किया और कहा कि वकील के रूप में नामांकित होने के लिए विधि स्नातक से लिया जाने वाला शुल्क 600 रुपये है और केवल संसद ही कानून में संशोधन कर इसे बढ़ा सकती है।

'दिव्यांग बच्चे की मां को देखभाल अवकाश देने से इनकार संवैधानिक कर्तव्य का उल्लंघन'

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि दिव्यांग बच्चे की देखभाल करने वाली मां को बाल देखभाल अवकाश देने से मना करना कार्यबल में महिलाओं की समान भागीदारी सुनिश्चित करने संबंधी सरकार के संवैधानिक कर्तव्य का उल्लंघन होगा। प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला की पीठ ने दिव्यांग बच्चों की कामकाजी माताओं को बाल देखभाल अवकाश (सीसीएल) देने के मुद्दे पर नीतिगत निर्णय लेने के लिए हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने का भी निर्देश दिया।

पूर्व आईएएस अधिकारी प्रदीप की जमानत अर्जी पर गुजरात सरकार से मांगा जवाब

सरकारी भूमि के अवैध आवंटन मामले में आरोपी सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी प्रदीप शर्मा की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को गुजरात सरकार से जवाब मांगा। सरकारी भूमि के अवैध आवंटन के समय प्रदीप शर्मा कच्छ जिले के कलेक्टर के रूप में कार्यरत थे। जस्टिस अभय ओका और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने गुजरात सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा। प्रदीप शर्मा वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं और उन्होंने शीर्ष अदालत में जमानत याचिका दायर की है। 

प. बंगाल के राज्यपाल को नोटिस

पश्चिम बंगाल विधानसभा की ओर से पारित प. बंगाल विवि (संशोधन) विधेयक 2022 को मंजूरी देने में निष्क्रियता का आरोप लगाने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राज्यपाल सीवी आनंद बोस के कार्यालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। राज्य विधानसभा में यह विधेयक जून, 2022 में पारित किया गया था। इसमें सभी विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में राज्यपाल के स्थान पर सीएम को नियुक्त करने का प्रावधान किया गया था। 
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12वीं के बाद तीन साल की बैचलर ऑफ लॉ डिग्री की मांग पर विचार से सुप्रीम इन्कार

सुप्रीम कोर्ट ने 12वीं के बाद बीएससी, बीकॉम और बीए की तरह तीन वर्षीय बैचलर ऑफ लॉ कोर्स शुरू करने की मांग वाली वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की जनहित याचिका पर विचार करने से मना कर दिया। अश्विनी कुमार ने जनहित याचिका में शीर्ष अदालत को केंद्र सरकार बार काउंसिल ऑफ इंडिया को इस प्रस्ताव की संभावना तलाशने के लिए विशेषज्ञ पैनल बनाने का निर्देश देने की मांग की थी। सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा, एलएलबी की डिग्री पूरी करने के लिए मैच्योरिटी (परिपक्वता) की आवश्यकता होती है। इसके लिए मौजूदा पांच साल की अवधि भी कम है।
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