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SC: छात्राओं-कामकाजी महिलाओं को माहवारी अवकाश की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार, पढ़ें कोर्ट की अहम खबरें

Fri, 24 Feb 2023 10:24 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

शीर्ष अदालत ने कहा कि यह मुद्दा सरकार के नीतिगत दायरे में आता है। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि निर्णय लेने के लिए केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को अपील भेजी जा सकती है।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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छात्राओं और कामकाजी महिलाओं को उनके कार्यस्थल पर महावारी के दिनों में छुट्टी दिए जाने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है। इस याचिका में कोर्ट से अनुरोध किया गया था कि वह राज्यों को यह निर्देश दे कि वे माहवारी से होने वाली पीड़ा के मद्देनजर छात्राओं और महिलाओं के लिए अवकाश घोषित करें।
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शीर्ष अदालत ने कहा कि यह मुद्दा सरकार के नीतिगत दायरे में आता है। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि निर्णय लेने के लिए केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को अपील भेजी जा सकती है।

दिल्ली निवासी शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने याचिका में मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 की धारा 14 के अनुपालन के लिए केंद्र और सभी राज्यों को निर्देश देने का अनुरोध किया। अधिनियम की धारा 14 निरीक्षकों की नियुक्ति से संबंधित है और इसमें कहा गया है कि उपयुक्त सरकार ऐसे अधिकारियों की नियुक्ति कर सकती है और क्षेत्राधिकार की स्थानीय सीमाओं को परिभाषित कर सकती है जिसके भीतर वे इस कानून के तहत अपने कार्यों का निर्वहन करेंगे।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : सोशल मीडिया
असम के निर्दलीय विधायक की राहत बढ़ी
सुप्रीम कोर्ट ने संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के विरोध में हो रहे प्रदर्शनों और माओवादियों से संदिग्ध संबंधों से जुड़े एक मामले में असम के निर्दलीय विधायक अखिल गोगोई की राहत बढ़ा दी। अब गोगोई को गिरफ्तारी से और राहत मिल सकेगी। गिरफ्तारी से संरक्षण की अवधि शुक्रवार को बढ़ा दी।

कानूनविद् कथित रूप से नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध के दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ मुखर रहे हैं। उन्होंने गुवाहाटी उच्च न्यायालय के 9 फरवरी के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया था। हाईकोर्ट ने असम में विशेष एनआईए अदालत को उनके खिलाफ दो मामलों में से एक में आरोप तय करने की अनुमति दी थी।

इस बीच सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमण्यम और जस्टिस पंकज मिथल की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के उपलब्ध नहीं होने की बात कहने के बाद मामले को 27 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दिया। पीठ ने कहा कि सुनवाई सोमवार तक के लिए स्थगित की जाती है। अंतरिम आदेश जारी रहेगा।

भारत में आम आदमी भ्रष्टाचार से त्रस्त: कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारत में आम आदमी भ्रष्टाचार से त्रस्त है। सभी स्तरों पर जवाबदेही तय करने की जरूरत है। कोर्ट ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई करते हुए कि जिसमें उन लोगों को चुनाव लड़ने से रोकने का अनुरोध किया गया है जिनके खिलाफ आपराधिक मामलों में आरोप तय किए जा चुके हैं। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि अगर भारत को वास्तव में वह बनना है जिसके लिए वह प्रयास कर रहा है तो उसे अपने मूल मूल्यों की ओर लौटना होगा।

जस्टिस केएम जोसेफ और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्न ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि भारत में आम आदमी भ्रष्टाचार से त्रस्त है। किसी भी सरकारी दफ्तर में चले जाइए, आप खराब अनुभव के बिना बाहर नहीं आ सकते। प्रख्यात न्यायविद नानी पालकीवाला ने अपनी किताब ‘वी द पीपल’ में इस बारे में बात की है। अगर आपको वास्तव में वैसा देश बनना है जिसके लिए हम प्रयास कर रहे हैं, तो हमें अपने मूल मूल्यों और चरित्र की ओर लौटना पड़ेगा। अगर हम अपने मूल्यों पर लौटते हैं तो हमारा देश वैसा बन जाएगा जिसके लिए हम प्रयास कर रहे हैं।

जनहित याचिका दायर करने वाले वकील अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि जघन्य अपराध में जिस व्यक्ति के खिलाफ आरोप तय किए गए हो, वह किसी सरकारी कार्यालय में चपरासी तक या पुलिस कांस्टेबल तक नहीं बन सकता, लेकिन वही व्यक्ति मंत्री बन सकता है, चाहे उस पर वसूली, अपहरण और हत्या जैसे अपराधों के मामले दर्ज क्यों न हो।

सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media
निचली अदालत के जज से स्पष्टीकरण मांगने वाले हाईकोर्ट के आदेश पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने एक निचली अदालत के जज से आरोपी को जमानत देने पर स्पष्टीकरण मांगने वाले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश पर शुक्रवार को रोक लगा दी। शीर्ष अदालत ने कहा, ऐसे आदेश जिला न्यायपालिका की स्वतंत्रता को प्रभावित करते हैं। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई और आपराधिक मामले में आरोपी तोताराम को जमानत दे दी। पीठ ने कहा, यह जमानत देने के लिए एक उपयुक्त मामला है क्योंकि कथित अपराधों में अधिकतम सजा के रूप में आजीवन कारावास या मृत्युदंड नहीं है और इसके अलावा, अन्य आरोपियों को पहले भी यही राहत दी जा चुकी है। प्रथम दृष्टया हाईकोर्ट का संबंधित जिला अदालत के जज से स्पष्टीकरण मांगने का कोई औचित्य नहीं था। इस तरह के आदेश जमानत आवेदनों पर विचार करने में जिला न्यायपालिका की स्वतंत्रता को प्रभावित करते हैं। तोताराम आपराधिक धमकी और महिला की अस्मिता भंग करने समेत अन्य आरोपों में मुकदमे का सामना कर रहा था।

सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
सुप्रीम कोर्ट की कड़ी आपत्ति के बाद सुवेंदु अधिकारी ने वापस ली याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने विधायक मुकुल रॉय को अयोग्य घोषित करने वाले पश्चिम बंगाल के स्पीकर फैसले को चुनौती देने वाली भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी की याचिका पर शुक्रवार को कड़ी आपत्ति जताई। कोर्ट की आपत्ति के बाद अधिकारी के वकील ने याचिका वापस ले ली। जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने शुभेंदु अधिकारी के वकील सीएस वैद्यनाथन से कहा, यह कोई तरीका नहीं होता। आपने पहले भी ऐसी ही याचिका दाखिल की थी और फिर उसे वापस लिया। आप जानते हैं कि इस मामले में एक रिट याचिका हाईकोर्ट में विचाराधीन है। आप इस तरह हाईकोर्ट को बाईपास नहीं कर सकते। हम इस पर कड़ी आपत्ति जताते हैं। इस पर वैद्यनाथन ने अदालत से माफी मांगी, लेकिन बताया कि वर्तमान याचिका 11 अप्रैल, 2022 के हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली सुप्रीम कोर्ट में लंबित एक अन्य याचिका के रूप में दायर की गई है। पीठ ने वैद्यनाथन से कहा, आप वरिष्ठ वकील हैं, माफी मांगने की जरूरत नहीं है। लेकिन याचिकाकर्ता जो प्रक्रिया अपना रहे हैं वह ठीक नहीं। बाद में वैद्यनाथन ने याचिका वापस ले ली।
 
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सांकेतिक तस्वीर
राज्य सरकार जनता और उसके हितों की संरक्षक: सुप्रीम कोर्ट
भूमि अधिकरण के एक मामले में हरियाणा सरकार पर तल्ख टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार जनता और उसके हितों की संरक्षक है। हरियाणा सरकार ने अधिग्रहण की कार्यवाही से निपटने का जो तरीका अपनाया, वह बहुत ही निंदनीय था। राज्य सरकार ने या तो अधिग्रहित भूमि को जारी कर दिया या अधिग्रहण को मनमाने तरीके से रद्द करने की अनुमति दे दी। शीर्ष अदालत कुरुक्षेत्र में आवासीय और वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए भूमि के अधिग्रहण से संबंधित याचिकाओं के समूह पर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के अप्रैल 2021 के फैसले से उत्पन्न मामलों पर सुनवाई कर रही थी। जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने कहा, राज्य भविष्य में ध्यान रखेगा और अधिग्रहीत भूमि का उपयोग उसी उद्देश्य के लिए करेगा जिसके लिए इसे अधिग्रहित किया गया है, अन्यथा अधिग्रहण का उद्देश्य विफल हो जाएगा।
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