सुप्रीम कोर्ट ने की पंजाब हरियाण हाईकोर्ट में जस्टिस लापिता को स्थायी करने की सिफारिश
सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की अतिरिक्त जज जस्टिस लापिता बनर्जी को स्थायी जज बनाने की सिफारिश की है। कॉलेजियम ने साथ ही झारखंड, कलकत्ता, केरल और झारखंड के हाईकोर्ट में जजों के नामों की सिफारिश की है।
कॉलेजियम ने केंद्र को झारखंड हाईकोर्ट में जज की नियुक्ति के लिए न्यायिक अधिकारी अरुण कुमार राय के नाम की सिफारिश की है। राय 5 मई 2012 को न्यायिक अधिकारी बनाए गए थे और उन्होंने बतौर न्यायिक अधिकारी झारखंड में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं। वहीं जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव को झारखंड हाईकोर्ट में और जस्टिस शोभा अनम्मा को केरल हाईकोर्ट में स्थायी जज बनाने की सिफारिश की। कॉलेजियम ने कॉलेजियम ने 18 जनवरी की सिफारिश में कलकत्ता हाईकोर्ट में स्थायी जज बनाने के लिए जस्टिस अनन्या बंद्योपाध्याय, जस्टिस राय चट्टोपाध्याय, जस्टिस शांपा दत्त और जस्टिस राजा बासू चौधरी के नाम भेजे। साथ ही जस्टिस सुभेंदु सामंत को 18 मई से एक वर्ष के नए कार्यकाल के लिए अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने की भी सिफारिश की है।
सुप्रीम कोर्ट ने एक पूर्ण अदालत (फुल कोर्ट) की बैठक में लिए फैसले में 56 अधिवक्ताओं को वरिष्ठ वकील के रूप में नामित किया। प्रतिष्ठित वकील के रूप में पदोन्नत होने पाने वालों में उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त महाधिवक्ता अर्धेन्दुमौली कुमार प्रसाद, तमिलनाडु के अतिरिक्त महाधिवक्ता अमित आनंद तिवारी, मध्य प्रदेश के अतिरिक्त महाधिवक्ता सौरभ मिश्रा और पंजाब के पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता सुनील फर्नांडीस, बिलकिस बानो की पैरवी करने वाली शोभा गुप्ता, पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर सरकार के वकील रह चुके शोएब आलम, 1984 के भोपाल गैस रिसाव मामले के पीड़ितों की ओर से केस लड़ने वाली वकील करुणा नंदी, कई मामलों में न्याय मित्र के रूप में काम करने वाले वकील गौरव अग्रवाल आदि शामिल हैं। वरिष्ठ वकील के पदनाम की शर्तों में एक वकील के रूप में 10 वर्ष का अनुभव शामिल है।
रेलवे के खिलाफ मध्यस्थता फैसले पर सुप्रीम आपत्ति कहा-ऐसे जनता का पैसा बर्बाद नहीं होने दे सकते
सुप्रीम कोर्ट ने दक्षिण पूर्व रेलवे को एक निजी फर्म को 1,301 करोड़ रुपये का भुगतान करने के लिए कहने वाले मध्यस्थता फैसले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि सार्वजनिक धन को इस तरह बर्बाद नहीं होने दिया जा सकता। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की तीन सदस्यीय पीठ ने ने प्रथम दृष्टया एकमात्र मध्यस्थ के मध्यस्थता फैसले में गलती पाई और कहा, कम कहा जाए तो बेहतर है। जज के रूप में हम भी बहुत सी बातें जानते हैं।
सीजेआई ने कहा, मैं मध्यस्थता के फैसले से खुश नहीं हूं। मामले को एक निष्पक्ष मध्यस्थ के पास भेजा जाए और इसकी फिर से सुनवाई होने दीजिए। अगर रेलवे वहां हार जाता है... तो ठीक है। लेकिन, मध्यस्थता प्रक्रिया को इस तरह चलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। यही कारण है कि मध्यस्थता को बदनाम किया जा रहा है। पीठ कुछ संविदात्मक विवाद के कारण कोलकाता स्थित फर्म रश्मी मेटालिक्स लिमिटेड के पक्ष में दिए गए मध्यस्थता फैसले के खिलाफ दक्षिण पूर्व रेलवे की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। कलकत्ता हाईकोर्ट ने मध्यस्थता फैसले के संचालन पर बिना शर्त रोक लगा रखी है। हाईकोर्ट ने भी इस फैसले में कई अनियमितताओं की बात की है। सीजेआई ने कहा कि वह इस मामले के लिए मध्यस्थ नियुक्त करेंगे।
गवाह की सुरक्षा हटाने पर सुप्रीम कोर्ट ने एमपी पुलिस को लगाई फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने एक मृत कांग्रेस नेता के बेटे की सुरक्षा हटाने के लिए शुक्रवार को मध्य प्रदेश पुलिस को फटकार लगाई। साथ ही कहा कि वह अभियोजन पक्ष के गवाह के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रही है। अदालत ने कहा कि आप लोगों के जीवन के साथ खेल रहे हैं। आप अभियोजन पक्ष के गवाह को सुरक्षा नहीं दे रहे हैं बल्कि गुंडों को सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं। इसके साथ ही न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने मध्य प्रदेश के दमोह जिले के पुलिस अधीक्षक को कांग्रेस नेता देवेंद्र चौरसिया के बेटे सोमेश चौरसिया को 24 घंटे के भीतर सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया।