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Supreme Court Updates: ‘बांग्लादेश से अस्थियां लाना हमारा काम नहीं’, एल्गार परिषद मामले में शोमा सेन को जमानत

Fri, 05 Apr 2024 10:19 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

शीर्ष कोर्ट ने एक अप्रैल को दिल्ली के प्रधान सचिव (वित्त) को आप सरकार की याचिका पर नोटिस जारी किया था। इस याचिका में आप सरकार ने आरोप लगाया था कि विधानसभा द्वारा बजटीय मंजूरी के बावजूद अधिकारी दिल्ली जल बोर्ड को धन जारी नहीं कर रहे हैं।
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सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने आप सरकार की याचिका पर दिल्ली जल बोर्ड को नोटिस जारी किया है। आप सरकार ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि दिल्ली जलबोर्ड ने राष्ट्रीय राजधानी में पीने योग्य पानी की आपूर्ति करने वाले संस्थान को धनराशि जारी नहीं की थी। इस मामले में शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने सुनवाई करते हुए ये नोटिस जारी किया है।  इस नोटिस में अदालत ने बकाया धनराशि के बारे में जानकारी मांगी है।
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साथ ही अदालत ने दिल्ली सरकार के प्रधान सचिव (वित्त) को धनराशि जारी करने के लिए भी कहा है। इस मामले की अगली सुनवाई के लिए अदालत ने 10 अप्रैल की तारीख तय की है। 

इससे पहले, इसी मामले में शीर्ष कोर्ट ने एक अप्रैल को दिल्ली के प्रधान सचिव (वित्त) को आप सरकार की याचिका पर नोटिस जारी किया था। इस याचिका में आप सरकार ने आरोप लगाया था कि विधानसभा द्वारा बजटीय मंजूरी के बावजूद अधिकारी दिल्ली जल बोर्ड को धन जारी नहीं कर रहे हैं। शीर्ष कोर्ट में आप सरकार का पक्ष रख रहे वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी ने कहा था कि आप सरकार का दावा है, 'मेरे सिविल सेवक मेरी बात नहीं सुनते हैं।'  उन्होंने अदालत को बताया था कि दिल्ली जल बोर्ड को अभी तक 1,927 करोड़ रुपये जारी नहीं किए गए हैं। सिंघवी ने पीठ को बताया था कि 31 मार्च तक धनराशि जारी नहीं की गई तो ये रुपये लैप्स हो जाएंगे। इस पर पीठ ने कहा था कि फैसले को पलटा भी जा सकता है, चाहे 31 मार्च की समयसीमा समाप्त भी हो जाए। 
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गौरतलब है कि अरविंद केजरीवाल सरकार ने नौकरशाही और दिल्ली में सत्तारूढ़ आप सरकार से जुड़े इस मुद्दे पर 20 मार्च को शीर्ष अदालत का रुख किया था। दिल्ली सरकार ने दिल्ली जल बोर्ड के लिए 3000 करोड़ रुपये रिलीज नहीं किए जाने का आरोप लगाया था 
 

सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

उत्तर प्रदेश में कथित धर्मातंरण के आरोपी को मिली जमानत 
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के सैम हिगिनबॉटम यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर, टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज (SHUATS) के कुलपति राजेंद्र बिहारी लाल के साथी को जमानत दी है। उस पर कथित अवैध धार्मिक रूपांतरण से संबंधित एक आपराधिक मामले में जांच चल रही थी। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने मध्य प्रदेश के इंदौर निवासी आरोपी राम सेवक के लिए 25 हजार रुपये जमानत राशि तय की है। कोर्ट ने कहा कि जमानत की अन्य शर्तें निचली अदालत तय करेगी।

सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

फुटबॉल महासंघ से जुड़ी याचिकाओं पर विचार करेगा सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ से संबंधित याचिकाओं को सूचीबद्ध करने और इसके संविधान को अंतिम रूप देने पर विचार करने के लिए सहमत हो गया। संविधान को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एल नागेश्वर राव ने तैयार किया है। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने मामले में न्याय मित्र वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन की दलीलें सुनी। शंकरनारायणन ने कहा कि याचिकाओं पर सुनवाई की जरूरत है। उन्होंने कहा कि 19 मार्च को 5 अप्रैल के लिए याचिकाएं सूचीबद्ध की गई थीं। पीठ ने आश्वासन दिया कि मामला जल्द ही सुनवाई के लिए तय किया जाएगा। शीर्ष अदालत ने भारतीय ओलंपिक संघ और एआईएफएफ से संबंधित दो अलग-अलग याचिकाओं को स्वीकार किया है।
 

सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

तमिलनाडु के मंत्री पेरियासामी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 8 अप्रैल को सुनवाई
भ्रष्टाचार के मामले में मुकदमा चलाने के मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली तमिलनाडु के ग्रामीण विकास मंत्री आई पेरियासामी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 8 अप्रैल को सुनवाई करेगा। पेरियासामी की ओर से तत्काल सुनवाई की अपील के बाद न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने कहा कि वह इस मामले पर सोमवार को सुनवाई करेगी। अधिवक्ता राम शंकर के माध्यम से दायर आवेदन में पेरियासामी ने शीर्ष अदालत से चेन्नई की एक अदालत के समक्ष भ्रष्टाचार के मामले में मुकदमे को स्थगित करने और व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट देने के लिए निर्देश देने की मांग की। मंत्री ने उच्च न्यायालय के 26 फरवरी के आदेश के खिलाफ अपील की है, जिसने ट्रायल कोर्ट के पिछले साल के 17 मार्च के डिस्चार्ज आदेश को रद्द कर दिया था। शीर्ष अदालत ने 18 मार्च को कहा था कि याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि आईपीसी की धारा 197 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19 (1) के तहत उनके अभियोजन के लिए पूर्व मंजूरी दी जाए। इसके लिए प्रदेश के राज्यपाल से प्राप्त करना आवश्यक है।

एल्गार परिषद मामला  शोमा सेन को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत
एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में जून 2018 में गिरफ्तार अकादमिक कार्यकर्ता शोमा कांति सेन (66) को सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को जमानत दे दी। सर्वोच्च अदालत से उन्हें जमानत उनकी लंबी हिरासत अवधित के दौरान आरोप तय करने में देरी के आधार पर मिली।
न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि किसी भी प्रकार की स्वतंत्रता से वंचित करना संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है। इसे निष्पक्ष प्रक्रिया का पालन करने के आधार पर उचित ठहराया जाना चाहिए। इस बात का कोई सबूत नहीं है कि वह प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन सीपीआई (माओवादी) की सदस्य थी।

 

छत्तीसगढ़ शराब घोटाले पर शीर्ष अदालत की टिप्पणी
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा है कि वह छत्तीसगढ़ में करीब 2,000 करोड़ रुपये के शराब घोटाले में पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा और उनके बेटे यश के खिलाफ मनी लांड्रिंग की शिकायत रद्द कर सकती है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि मामले में प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) और एफआईआर देखने से पता चलता है कि कोई विधेय अपराध नहीं हुआ है और न ही कोई अवैध राशि है, ऐसे में जब कोई आपराधिक राशि ही नहीं है तो मनी लॉन्ड्रिंग का मामला ही नहीं बनता। इस मामले में अगली सुनवाई के लिए अदालत ने आठ अप्रैल की तारीख तय की है। इस पर ईडी का पक्ष रख रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने पीठ से नई शिकायत दर्ज करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी के पास पर्याप्त सामग्री है और अगर पीठ शिकायत को रद्द करना चाहती है तो ईडी को नई शिकायत दर्ज करने की अनुमति दी जाए। ताकि हम मामले में आगे बढ़ सकें। साथ ही अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल राजू ने यह भी कहा कि अदालत ने पूर्व में इस मामले में आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई न करने जैसे आदेश दिए थे, उन आदेशों को भी रद्द किया जाना चाहिए।
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भारत में जन्मे पाकिस्तानी सूफी की अस्थियां बांग्लादेश से लाना हमारा काम नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सूफी हजरत शाह मुहम्मद अब्दुल मुक्तादिर शाह मसूद अहमद की अस्थियों को बांग्लादेश से भारत लाने की मांग करने वाली याचिका खारिज कर दी। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि वह एक पाकिस्तानी नागरिक थे, लिहाजा उनकी अस्थियों को भारत लाने का आदेश नहीं दिया जा सकता है।
याचिकाकर्ता दरगाह हजरत मुल्ला सैयद ने दलील दी थी कि मुहम्मद अब्दुल मुक्तादिर शाह मसूद अहमद का पाकिस्तान में कोई परिवार नहीं है। वे उत्तर प्रदेश की दरगाह सज्जादा-नशीन (प्रमुख) थे और इलाहाबाद में जन्मे थे। 1992 में उन्हें पाकिस्तान की नागरिकता मिली थी। 2008 में उन्हें दरगाह हजरत मुल्ला सैयद मोहम्मद शाह के सज्जादा नशीन के रूप में चुना गया था। उन्होंने 2021 में दरगाह में दफनाए जाने की इच्छा व्यक्त की थी। लेकिन, ढाका में उनकी मृत्यु हो गई और उन्हें वहीं दफना दिया गया।

 
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