धवन ने दलील दी कि उन्होंने 2019 में सीबीआई निदेशक के समक्ष अस्थाना के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने पुलिस पर जबरन वसूली, उत्पीड़न और दस्तावेजों से छेड़छाड़ के आरोप लगाए थे।
हाईकोर्ट के बाद अब सुप्रीम कोर्ट से भी दांत के एक डॉक्टर को झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने मंगलवार को हाईकोर्ट के एक आदेश खिलाफ दी गई याचिका को खारिज कर दिया है। दरअसल, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के महानिदेशक व सीबीआई के पूर्व विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ भ्रष्टाचार के तहत मुकदमा चलाने की मांग वाली याचिका को दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। इसी के खिलाफ डॉक्टर ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति प्रसन्ना भालचंद्र वराले की पीठ ने कहा, 'संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।'
यह है मामला
दरअसल, अस्थाना के खिलाफ चंडीगढ़ निवासी डॉ. मोहित धवन ने याचिका दाखिल कर मुकदमा चलाने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि अस्थाना के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप में शिकायत केंद्रीय सर्तकता आयुक्त और सीबीआई के पास काफी लंबे समय से लंबित है, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। हालांकि, हाईकोर्ट ने 15 फरवरी, 2021 को उनकी याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद वह सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, जहां से भी उनको निराशा हाथ लगी।
विज्ञापन
20 हजार का लगा था जुर्माना
इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था। याचिका पर सुनवाई करने से हाईकोर्ट के जज योगेश खन्ना ने अपने आप को अलग कर लिया था. जस्टिस खन्ना ने अज्ञात कारणों से अपने आप को इस मामले में अलग कर लिया और इस मामले की सुनवाई किसी अन्य पीठ से कराने का आग्रह किया था, इसके साथ ही उन्होंने इस मामले की सुनवाई 15 फरवरी के लिए स्थगित कर दी थी.
धवन ने दलील दी कि उन्होंने 2019 में सीबीआई निदेशक के समक्ष अस्थाना के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने पुलिस पर जबरन वसूली, उत्पीड़न और दस्तावेजों से छेड़छाड़ के आरोप लगाए थे।