सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कोई मामला हाईकोर्ट में लंबित हो तो वैसी ही याचिका शीर्ष अदालत में दाखिल करना काननी प्रक्रिया को धता बताना है। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता पर एक लाख रुपये का जुर्माना किया है।
न्यायमूर्ति कूरियन जोसेफ और न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन की पीठ ने कहा है कि कानून के तहत अगर याचिकाकर्ता ने संविधान की धारा-226 के तहत हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर रखी है तो वह संविधान की धारा-32 के तहत वह सुप्रीम कोर्ट में उसी राहत केलिए याचिका दाखिल नहीं कर सकता। वास्तव में याचिकाकर्ता प्रतिभा रमेश पाटिल ने सरफेसी एक्ट की धारा-13 सहित कई अन्य एक्ट को असंवैधानिक करार देने की गुहार लगाई थी।
पीठ ने पाया कि याचिकाकर्ता ने इसी तरह की याचिका बांबे हाईकोर्ट में भी दायर कर रखी है। हाईकोर्ट ने इस याचिका पर अंतरिम आदेश भी पारित किया था। पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट के मामला लंबित होने केबावजूद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करना शर्मनाक या बेहद खराब है। पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा ऐसा करना कानून का दुरूपयोग भले न हो लेकिन कानूनी प्रक्रिया को धता बताना जरूर है।