सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को संकेत दिए कि वह अनुच्छेद-370 को हटाने को चुनौती देने के मुद्दे को सात सदस्यीय बड़ी पीठ को सौंपने पर विचार कर सकता है लेकिन इससे पहले वह इस मुद्दे पर सभी पक्षों की प्रारंभिक दावों को सुनेगा। अनुच्छेद-370 के तहत जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा हासिल था लेकिन केंद्र सरकार ने 5 अगस्त को इसे खत्म कर दिया। उसके फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।
शाह फैसल और शेहला रशीद के वकील राजू रामचंद्रन ने गुरुवार को भी अपनी दलीलें रखीं। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 की स्कीम में लोकतांत्रिक शक्ति राज्य के पास है जबकि कार्यकारी शक्ति केंद्र सरकार के पास है। जम्मू-कश्मीर राज्य के पास अपने सांविधानिक ढांचे के साथ ही राज्य के केंद्र सरकार के साथ सांविधानिक संबंधों को निर्धारित करने की शक्ति है।
यह जम्मू-कश्मीर राज्य है जो लोकतांत्रिक तौर पर अपनी निर्वाचक शक्तियों के संविधान के अनुरूप इस्तेमाल पर फैसला कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट के बुधवार को उठाए गए एक सवाल का जवाब देते हुए वरिष्ठ वकील ने कहा कि यह एकमात्र जम्मू-कश्मीर राज्य है जो यह तय कर सकता है कि राज्य की संविधान सभा का उत्तराधिकारी कौन होगा और भविष्य में कौन इसकी शक्तियों में बदलाव कर सकता है। मौजूदा समय में राज्य की बजाय राष्ट्रपति के माध्यम से केंद्र सरकार यह तय कर रहा है।