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सुप्रीम कोर्ट: बिना किसी मतलब के याचिका दाखिल करने के साहस पर एक वकील को चेतावनी, जानें पूरा मामला 

Mon, 14 Mar 2022 09:39 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

याचिकाकर्ता ने अपनी रिट याचिका के जरिये कोर्ट का बहुमूल्य समय बर्बाद किया है। इस वक्त को अन्य अहम मामलों की सुनवाई पर खर्च किया जा सकता था।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक वकील को भविष्य में सावधान रहने को कहा। साथ ही उसे बिना किसी मतलब के याचिका दायर करने के साहस के खिलाफ चेताया। जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने मौजूदा अकादमिक सत्र के लिए नीट-पीजी परीक्षा के लिए कटऑफ अंकों में राहत के लिए दाखिल जनहित याचिका को खारिज कर दिया। 

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पीठ ने पहले वकील से नीट-पीजी परीक्षा के लिए कटऑफ अंक में राहत मांगने को लेकर दायर पीआईएल के मकसद पर पूछा। पीठ यह जानने के बाद काफी नाराज हुई कि वकील ने चीफ जस्टिस के नेतृत्व वाली पीठ के समक्ष पीआईएल पर तत्काल सुनवाई की मांग की और इसके बाद फिर पीठ के समक्ष मामले को दाखिल किया। इतना ही मामले को सूचीबद्ध कराने में भी कामयाब रहा जबकि उसका इससे कोई संबंध नहीं था। 

पीठ ने कहा कि नेशनल बोर्ड ऑफ एक्जामिनेशन पहले ही नीट-पीजी में 15 पर्सेंटाइल की कटौती करने का निर्णय ले चुका है। याचिकाकर्ता का इससे कोई लेनादेना भी नहीं है। याचिकाकर्ता ने तीसरे चरण की काउंसिलिंग पर रोक लगाने की भी मांग की। आदेश में कहा गया कि याचिकाकर्ता एमएन उमेश को इस मुद्दे से कोई मतलब नहीं है और उसने याचिका बस इसलिए दायर की क्योंकि वह जन वकील होने का दावा करता है। 
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याचिकाकर्ता ने अपनी रिट याचिका के जरिये कोर्ट का बहुमूल्य समय बर्बाद किया है। इस वक्त को अन्य अहम मामलों की सुनवाई पर खर्च किया जा सकता था। वकील को भविष्य में सतर्क रहने के लिए आगाह किया जाता है और उसे ऐसी रिट याचिकाएं दायर करने के साहस से दूर रहने को कहा जाता है। साथ ही पीठ ने याचिका का निपटारा कर दिया। पीठ की फटकार के बाद वकील ने माफी मांगी।

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