सुप्रीम कोर्ट में गुजरात में मोरबी पुल हादसे की जांच के लिए न्यायिक आयोग के गठन की मांग वाली याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने अधिवक्ता विशाल तिवारी की जनहित याचिका पर सुनवाई की। हादसे में 130 से अधिक लोगों की मौत हुई थी।
इस दौरान उच्चतम न्यायालय ने घटना के संबंध में गुजरात उच्च न्यायालय से समय-समय पर जांच और अन्य संबंधित पहलुओं की निगरानी करने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को स्वतंत्र सीबीआई जांच, पर्याप्त मुआवजा संबंधी याचिकाओं के साथ हाईकोर्ट का रुख करने की अनुमति दी।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि 140 से अधिक लोगों की जान लेने वाला मोरबी पुल हादसा एक भयानक त्रासदी थी। कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट से समय-समय पर मामले की सुनवाई करते रहने और जांच पर नजर बनाए रखने को कहा। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने कहा कि यह एक बहुत बड़ी त्रासदी है। इसके लिए साप्ताहिक निगरानी की आवश्यकता होगी।
शीर्ष अदालत ने कहा कि गुजरात उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली एक खंडपीठ ने पहले ही इस घटना का स्वत: संज्ञान ले लिया है और तीन आदेश पारित कर दिए हैं। ऐसे में हम अभी याचिकाओं पर सुनवाई नहीं करेंगे। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से स्वतंत्र जांच और अपने परिवार के सदस्यों को खोने वाले लोगों को सम्मानजनक मुआवजे की मांग वाली अपनी याचिकाओं के साथ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को कहा।
मोरबी में मच्छू नदी पर बना ब्रिटिश काल का पुल 30 अक्तूबर को ढह गया था, जिसमें 47 बच्चों सहित 140 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। शीर्ष अदालत इस घटना में अपने दो रिश्तेदारों को खोने वाले व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें सीबीआई जांच की मांग, अपने परिवार के सदस्यों को खोने वालों को सम्मानजनक मुआवजा देने और नगर पालिका के अधिकारियों के खिलाफ जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई थी।