विरोध-प्रदर्शन में जिनके नाम बुलडोजर से उनके ही घर गिराए
यूपी में हो रही बुलडोजर कार्रवाई मामले में सुप्रीम कोर्ट में जमीयत की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सीयू सिंह और नित्या रामकृष्णन ने पीठ से कुछ अंतरिम आदेश जारी करने का अनुरोध किया। ताकि, यह सुनिश्चित किया जा सके कि अथॉरिटी प्रदर्शनों में शामिल या हिंसक विरोध के मामलों में नामित लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई के रूप में बुलडोजर चलाने से बचें। दोनों वकीलों ने कहा, यह कैसा संयोग है कि भाजपा नेताओं की टिप्पणियों पर हालिया विरोध-प्रदर्शनों से संबंधित मामलों में जिन लोगों का नाम लिया गया, उनकी संपत्तियों को ढहाया गया।
सिंह ने दावा किया कि सीएम योगी आदित्यनाथ समेत उच्च सांविधानिक पदाधिकारियों ने बयान दिए कि प्रदर्शनकारियों को सबक सिखाने के लिए बुलडोजर का इस्तेमाल किया जाएगा। इस पर साल्वे ने कहा, विध्वंस कार्रवाई पर न्यायाधीशों की चिंताओं को नोट किया गया है और सुनवाई की अगली तारीख से पहले संबंधित अथॉरिटी को इससे अवगत कराया जाएगा। साल्वे ने कहा, हमें तीन दिनों के भीतर एक हलफनामे के माध्यम से सब कुछ रिकॉर्ड पर लाने की अनुमति दी जाए। याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी कि राज्य में उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना कोई और विध्वंस नहीं किया जाए।
जमीयत ने दिए तीन उदाहरण...
- प्रयागराज से संबंधित पहले मामले में 10 मई को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिसमें 22 मई को व्यक्तिगत सुनवाई तय की गई थी, जो दंगे से काफी पहले की है। 25 मई को विध्वंस आदेश पारित किया गया था। इसलिए यह ऐसा मामला नहीं हो सकता है जहां संबंधित व्यक्ति खुद अदालत का दरवाजा खटखटाने में सक्षम नहीं था।
- कानपुर में भी एक संपत्ति मालिक को
- अगस्त 2020 में ही कारण बताओ नोटिस जारी गया था।
- कानपुर के दूसरे मामले में नोटिस तामील करने के बाद चहारदीवारी को गिराया गया था।
मीडिया मुद्दे उठाता है और इसे किसी अन्य चीज से जोड़कर हवा देता है : साल्वे
साल्वे ने कहा, मीडिया मुद्दे उठाता है और इसे किसी अन्य चीज से जोड़कर हवा देता है। लेकिन हम सब कुछ एक हलफनामे के जरिये रखेंगे। एक सामान्य आदेश क्यों पारित किया जाना चाहिए? मेहता ने कहा, जिस व्यक्ति ने ढांचा खड़ा करने में कानून का उल्लंघन किया है उसे अदालत के किसी भी आदेश के तहत शरण नहीं मिलनी चाहिए और यूपी में विध्वंस के हर मामले में प्रक्रिया का पालन किया जाता है। उन्होंने भी इस स्तर पर किसी भी सामान्य आदेश जारी करने का विरोध किया।