सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्पष्ट शर्तों में उल्लंघन निर्दिष्ट किए बिना किसी उद्योग को बंद करने से कंपनी में किए गए निवेश पर असर पड़ता है। शीर्ष अदालत तमिलनाडु के थूथुकुडी में वेदांत समूह की कंपनी स्टरलाइट कॉपर के संयंत्र को बंद करने के खिलाफ समूह की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि अधिकारियों को किसी उद्योग को बंद करने के लिए उल्लंघनों का स्पष्ट ब्योरा देना होगा। तमिलनाडु के वकील सीएस वैद्यनाथन ने स्पष्ट किया कि राज्य ने तांबा संयंत्र को बंद नहीं किया है, बल्कि केवल पर्यावरण संबंधी चिंताओं के कारण इसे संचालित करने की सहमति देने से मना किया है। पीठ ने कहा कि कोई कंपनी यह नहीं कह सकती कि वह सिर्फ उन्हीं प्रावधानों का अनुपालन करेगी जिनके बारे में अधिकारियों ने बताया है। इसे जल अधिनियम या जो भी कानून लागू हो उसका अनुपालन करना होगा।
सामुदायिक रसोई खोलने पर निर्देश देने से किया इन्कार
सुप्रीम कोर्ट ने भूख और कुपोषण से निपटने के सिलसिले में सामुदायिक रसोई खोलने संबंधी याचिका पर कोई निर्देश जारी करने से इन्कार कर दिया। जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस पंकज मित्थल की पीठ ने कहा कि वैकल्पिक कल्याणकारी योजनाओं का कार्यान्वयन सुनिश्चित करना राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों पर निर्भर करता है। पीठ ने कहा, लोगों के लिए किफायती मूल्य पर पर्याप्त मात्रा में भोजन सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और राज्यों की ओर से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम और अन्य कल्याणकारी योजनाएं लागू हैं।
हम इस संबंध में कोई और निर्देश जारी नहीं करना चाहते। हम वैकल्पिक कल्याण योजनाओं के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करना राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों पर छोड़ते हैं। शीर्ष अदालत सामाजिक कार्यकर्ताओं अनुज धवन व अन्य की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों को भूख और कुपोषण से निपटने के सिलसिले में सामुदायिक रसोई खोलने के लिए योजना बनाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।