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सुप्रीम कोर्ट: अल्पसंख्यकों की पहचान के लिए याचिका पर केंद्र सरकार से मांगा जवाब, चार सप्ताह का समय दिया

Mon, 28 Mar 2022 08:51 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

याचिका में कहा गया है कि असली अल्पसंख्यकों को लाभ देने से इनकार और योजना के तहत ‘‘मनमाना और अतार्किक’ वितरण उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है जिसमें राज्य स्तर पर अल्पसंख्यकों की पहचान के लिए दिशानिर्देश बनाने के लिए निर्देश देने की मांग की गई है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस पर जवाब देने के लिए केंद्र सरकार को चार सप्ताह का समय दिया। याचिका में कहा गया है कि हिंदू 10 राज्यों में अल्पसंख्यक हैं।

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न्यायाधीश एसके कौल और एमएम सुंदरेश की पीठ ने सरकार को समय देने का फैसला करते हुए मामले की सुनवाई की अगली तारीख 10 मई तय कर दी। यह याचिका अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से दायर की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह इस याचिका पर अपना रुख स्पष्ट करे।

इससे पहले सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह कहते हुए दो सप्ताह का समय मांगा था कि उन्होंने अल्पसंख्यक मंत्रालय की ओर से दाखिल किए गए हलफनामे का ठीक से अध्ययन नहीं किया है। मंत्रालय ने हलफनामे में कहा है कि राज्य सरकारें अपने स्तर पर भाषाई या धार्मिक समुदायों को अल्पसंख्यक दर्जा दे सकती हैं।
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अर्जी में कहा गया, ‘‘वैकल्पिक तौर पर निर्देश दिया जाए कि लद्दाख, मिजोरम, लक्षद्वीप, कश्मीर, नगालैंड, मेघालय, अरुााचल प्रदेश, पंजाब और मणिपुर में रहने वाले यहूदी, बहाई और हिंदू धर्म के अनुयायी अपनी इच्छा और टीएमए पई के फैसले की भावना के तहत शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना और संचालन कर सकते हैं।’’

उल्लेखनीय है कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की ओर से पांच समुदायों (मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध और पारसी) को अल्पसंख्यक घोषित किए जाने के खिलाफ विभिन्न हाईकोर्ट में दाखिल याचिकाओं को शीर्ष अदालत में स्थानांतरित करने और मुख्य याचिका के साथ शामिल करने की अनुमति प्रदान कर दी थी।

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