सुप्रीम कोर्ट ने गौहाटी उच्च न्यायालय से पारित फैसले के कुछ अंश हटाने का निर्णय सुनाया है। हाईकोर्ट के एक मौजूदा न्यायाधीश ने 2017 में पारित फैसले में कुछ सख्त और प्रतिकूल टिप्पणियां की थीं। इसके खिलाफ अपील पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय की प्रतिकूल टिप्पणियों को फैसले से हटा दिया। टिप्पणी उस समय से जुड़ी है जब एनआईए की विशेष अदालत के न्यायाधीश ने आतंकवाद से संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान सख्त टिप्पणी की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा?
हाईकोर्ट के फैसले का अंश हटाने का निर्णय उच्चतम न्यायालय की पीठ में न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और पीएस नरसिम्हा की पीठ ने सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उच्च न्यायालय के बाकी फैसले लागू रहेंगे। पीठ ने कहा, "हमारी राय है कि पैराग्राफ 130, 190,191, 192, 193,194 और 233 और आदेश के किसी भी अन्य प्रासंगिक हिस्से में याचिकाकर्ता के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणियों को समाप्त माना जाएगा। फैसले के इन अंशों को किसी भी तरह से याचिकाकर्ता के खिलाफ नहीं माना जाएगा।
भविष्य में फैसले को चुनौती देने का रास्ता खुला रहेगा
अदालत ने कहा, हाईकोर्ट की अपमानजनक टिप्पणी को छोड़कर (Dehors) उच्च न्यायालय का उक्त आदेश/ निर्णय लागू रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि यदि बाद में किसी अन्य मामले में गौहाटी उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी जाती है तो याचिका की योग्यता के आधार पर विचार किया जाएगा।
एनआईए की विशेष अदालत की अपील पर फैसला
शीर्ष अदालत ने पहले राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को नोटिस जारी किया था। सुप्रीम कोर्ट ने "याचिकाकर्ता की पहचान का खुलासा किए बिना" मामले को सूचीबद्ध करने की अनुमति दी थी। अपनी याचिका में, एनआईए कोर्ट के न्यायाधीश ने 11 अगस्त के उच्च न्यायालय के फैसले का अंश हटाने की अपील की थी। उन्होंने उनके खिलाफ की गई "कुछ अपमानजनक टिप्पणियों" को हटाने की मांग की।