जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने मानवीय आधार पर राहत की अपील को खारिज कर दिया। शिविंदर ने अपने मामा के अंतिम संस्कार में शामिल होने और बीमार मां की मदद के लिए जमानत मांगी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने फोर्टिस हेल्थकेयर के प्रवर्तक शिविंदर मोहन सिंह की अंतरिम जमानत की अर्जी बुधवार को खारिज कर दी। शिविंदर पर रेलिगेयर फिरवेस्ट लिमिटेड के 2400 करोड़ रुपये में हेरफेर करने का आरोप है।
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जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने मानवीय आधार पर राहत की अपील को खारिज कर दिया। शिविंदर ने अपने मामा के अंतिम संस्कार में शामिल होने और बीमार मां की मदद के लिए जमानत मांगी थी।
दिल्ली पुलिस की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उसकी जमानत अर्जी का विरोध करते हुए कहा, वह 2400 करोड़ रुपये के हेरफेर में आरोपी है और रिहा करने पर उसके फरार होने का खतरा है। जिसके बार पीठ ने फैसला सुनाया, गंभीर आरोपों के मद्देनजर ऐसा संभव है कि राहत दिए जाने पर आरोपी फरार हो सकता है। इसलिए उसकी अंतरिम जमानत अर्जी खारिज की जाती है।