सुप्रीम कोर्ट ने हाथरस दुष्कर्म पीड़िता के परिवार के सदस्यों को स्थानांतरित करने और उसके परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने पर विचार करने के आदेश को चुनौती देने वाली उत्तर प्रदेश सरकार की याचिका सोमवार को खारिज कर दी। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जेबी पारदीवाला की पीठ ने इस तथ्य पर आश्चर्य व्यक्त किया कि राज्य ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ अपील दायर की थी।
उत्तर प्रदेश की अतिरिक्त महाधिवक्ता (एएजी) गरिमा प्रसाद ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि राज्य सरकार पीड़ितों के परिवार के सदस्यों को स्थानांतरित करने के लिए तैयार है, लेकिन वे नोएडा या गाजियाबाद या दिल्ली में स्थानांतरित होना चाहते हैं। उन्होंने परिवार के एक सदस्य को नौकरी दिए जाने के सवाल पर कहा कि क्या बड़े और विवाहित भाई को पीड़िता के "आश्रित" के रूप में माना जा सकता है, यह कानून का सवाल है जिसपर विचार किया जाना है। इस पर पीठ ने कहा कि वह मामले के "विशेष तथ्यों और परिस्थितियों" पर विचार करते हुए उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने के लिए इच्छुक नहीं है।
सीजेआई ने प्रसाद से कहा, ये परिवार को दी जाने वाली सुविधाएं हैं। हमें दखल नहीं देना चाहिए। राज्य को इन मामलों में नहीं आना चाहिए।जब एएजी ने अनुरोध किया कि कानून के सवाल को खुला रखा जाए, तो सीजेआई ने कहा कि आदेश में निर्दिष्ट किया गया था कि यह मामले के विशेष तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए पारित किया गया था।
14 सितंबर, 2020 को पीड़िता के गांव के चार पुरुषों द्वारा कथित रूप से दुष्कर्म किए जाने के एक पखवाड़े बाद 19 वर्षीय पीड़िता की दिल्ली के एक अस्पताल में मौत हो गई थी।